निर्देश : दिए गए गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प छाँटिए।…

20172021

निर्देश : दिए गए गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प छाँटिए।

धर्म पालन करने के मार्ग में सबसे अधिक बाधा चित्त की चंचलता, उद्देश्य की अस्थिरता और मन की निर्बलता से पड़ती है। मनुष्य के कर्तव्य मार्ग में एक ओर तो आत्मा के बुरे-भले कामों का ज्ञान दूसरी ओर आलस्य और स्वार्थपरता रहती है। बस मनुष्य इन्हीं दोनों के बीच में पड़ा रहा है। अंत में यदि उसका मन पक्का हुआ तो वह आत्मा की आज्ञा मानकर अपना धर्म पालन करता है, पर उसका मन दुविधा में पड़ा रहा है तो स्वार्थपरता उसे निश्चित ही घेरेगी और उसका चरित्र घृणा के योग्य हो जायेगा।

इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि आत्मा जिस बात को करने की प्रवृत्ति दे, उसे बिना स्वार्थ सोचे, झटपट कर डालना चाहिए। इस संसार में जितने बड़े-बड़े लोग हुए हैं सभी ने अपने कर्तव्य को सबसे श्रेष्ठ माना है, क्योंकि जितने कर्म उन्होंने किए उन सबने अपने कर्तव्य पर ध्यान देकर न्याय का बर्ताव किया। जिन जातियों में यह गुण पाया जाता है, वे ही संसार में उन्नति करती हैं और संसार में उनका नाम आदर से लिया जाता है। जो लोग स्वार्थी होकर अपने कर्तव्य पर ध्यान नहीं देते, वे संसार में लज्जित होते हैं और सब लोग उनसे घृणा करते हैं।

कर्तव्य पालन और सत्यता में बड़ा घनिष्ठ संबंध है। जो मनुष्य अपना कर्तव्य पालन करता है, वह अपने कामों और वचनों में सत्यता का बर्ताव भी रखता है। सत्यता ही एक ऐसी वस्तु है जिससे इस संसार में मनुष्य अपने कार्यों में सफलता पा सकता है, क्योंकि संसार में कोई काम झूठ बोलने से नहीं चल सकता। झूठ की उत्पत्ति पाप, कुटिलता और कायरता से होती है। झूठ बोलना कई रूपों में दिख पड़ता है, जैसे चुप रहना, किसी बात को बढ़ाकर कहना, किसी बात को छिपाना, झूठ-मूठ दूसरों की हाँ में हाँ मिलाना आदि। कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो मुँह देखी बातें बनाया करते हैं, पर करते वही हैं जो उन्हें रुचता है। ऐसे लोग मन में समझते हैं कि कैसे सबको मूर्ख बनाकर हमने अपना काम कर लिया, पर वास्तव में वे अपने को ही मूर्ख बनाते हैं और अंत में उनकी पोल खुल जाने पर समाज के लोग उनसे घृणा करते हैं।

'निर्बलता' शब्द में उपसर्ग और प्रत्यय का सही विकल्प है

Answer: A. निर् + बल + ताअवधारणा (Concept): किसी हिंदी शब्द की रचना मूल शब्द (धातु/शब्द) में उपसर्ग (शब्द से पहले जुड़कर अर्थ बदलने वाला अंश) और प्रत्यय (शब्द के अंत में जुड़कर नया…

  1. A.

    निर् + बल + ता

  2. B.

    निर + बल + ता

  3. C.

    निर + बलत + आ

  4. D.

    निर + बल + अता

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Correct answer: A

अवधारणा (Concept):

किसी हिंदी शब्द की रचना मूल शब्द (धातु/शब्द) में उपसर्ग (शब्द से पहले जुड़कर अर्थ बदलने वाला अंश) और प्रत्यय (शब्द के अंत में जुड़कर नया रूप/भाव देने वाला अंश) जोड़कर होती है। मानक नियम: "निः" उपसर्ग जब किसी घोष वर्ण (वर्ग के तीसरे, चौथे, पाँचवें अक्षर या य्, र्, ल्, व्, ह्) से पहले आता है, तो विसर्ग संधि के अनुसार "निर्" में बदल जाता है; तथा "ता" एक सामान्य भाववाचक प्रत्यय है जो विशेषण/संज्ञा से भाववाचक संज्ञा (गुण/अवस्था का बोध कराने वाला शब्द) बनाता है, जैसे सुंदर+ता=सुंदरता, समान+ता=समानता।

विश्लेषण (Application):

  1. मूल शब्द है "बल" (शक्ति/सामर्थ्य का बोधक संज्ञा-शब्द)।

  2. "ब" एक घोष वर्णाक्षर है, अतः उपसर्ग "निः" संधि नियम से "निर्" में बदलकर मूल शब्द से जुड़ता है: निर् + बल = निर्बल (जिसका अर्थ है "शक्तिहीन")।

  3. भाववाचक प्रत्यय "ता" जोड़ने पर निर्बल + ता = निर्बलता (अर्थात दुर्बलता/कमजोरी की अवस्था) बनता है।

  4. अतः शब्द "निर्बलता" का शुद्ध विभाजन है: निर् (उपसर्ग) + बल (मूल शब्द) + ता (प्रत्यय)।

जाँच (Cross-check):

शेष विकल्पों की जाँच से यह पुष्टि होती है: हलंत-रहित "निर" उपसर्ग विसर्ग संधि के नियम के विपरीत है (उच्चारण एवं वर्तनी दोनों में भिन्न); "बलत" कोई मान्य मूल शब्द नहीं है, न ही "आ" यहाँ भाववाचक प्रत्यय है; और मानक भाववाचक प्रत्यय सदैव "ता" होता है, "अता" नहीं। इस प्रकार व्याकरण की दृष्टि से एकमात्र शुद्ध विभाजन निर् + बल + ता ही सिद्ध होता है।

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