निम्नलिखित वाक्य के किस भाग में त्रुटि है? केदारनाथ धाम का मार्ग अत्यन्त दुरगम…
2025
निम्नलिखित वाक्य के किस भाग में त्रुटि है?
केदारनाथ धाम का मार्ग अत्यन्त दुरगम है।
Answer: D. दुरगम है — अवधारणाहिंदी में ‘दुर्’ (कठिन, बुरा) एक उपसर्ग है और इसके अंत का ‘र्’ हलंत रहकर अगले व्यंजन से जुड़ता है, जिससे संयुक्ताक्षर बनता है — दुर् + गम् = दुर्गम। इस…
- A.
धाम का
- B.
केदारनाथ
- C.
मार्ग अत्यन्त
- D.
दुरगम है
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Correct answer: D
अवधारणा
हिंदी में ‘दुर्’ (कठिन, बुरा) एक उपसर्ग है और इसके अंत का ‘र्’ हलंत रहकर अगले व्यंजन से जुड़ता है, जिससे संयुक्ताक्षर बनता है — दुर् + गम् = दुर्गम। इस ‘र्’ को स्वतंत्र पूर्ण ‘र’ के रूप में नहीं लिखा जाता।
अशुद्ध भाग पहचानने वाले प्रश्न में हर खंड की मानक वर्तनी और व्याकरणिक गठन अलग-अलग जाँचकर वह खंड ढूँढ़ना होता है जो मानक रूप से हटता है।
अनुप्रयोग
दिए गए वाक्य के चारों खंडों को वाक्य-क्रम में जाँचिए —
‘केदारनाथ’ — ‘केदार’ और ‘नाथ’ से बना व्यक्तिवाचक संज्ञा पद; इसकी मानक वर्तनी यही है।
‘धाम का’ — संज्ञा ‘धाम’ के साथ संबंधकारक परसर्ग ‘का’; रूप और प्रयोग दोनों मानक हैं।
‘मार्ग अत्यन्त’ — संज्ञा ‘मार्ग’ और परिमाणबोधक क्रियाविशेषण ‘अत्यन्त’ (अति + अन्त)। यह तत्सम पंचमाक्षर रूप शब्दकोशों में मान्य है; केंद्रीय हिंदी निदेशालय का मानकीकरण एकरूपता के लिए अनुस्वार-रूप ‘अत्यंत’ को वरीयता देता है, फिर भी दोनों रूप प्रचलित एवं शुद्ध माने जाते हैं, अतः यह वर्तनी-त्रुटि नहीं है।
‘दुरगम है’ — यहाँ ‘र’ पूर्ण व्यंजन के रूप में लिखा गया है, जबकि उपसर्ग ‘दुर्’ का ‘र्’ हलंत होकर ‘ग’ से जुड़ना चाहिए। मानक वर्तनी ‘दुर्गम’ है, अतः त्रुटि इसी खंड में है।
पुष्टि
इसी उपसर्ग वाले अन्य शब्दों से मिलान कीजिए — ‘र्’ सदैव हलंत रूप में ही जुड़ता है:
प्रचलित अशुद्ध रूप | मानक रूप |
|---|---|
दुरगम | दुर्गम |
दुरलभ | दुर्लभ |
दुरबल | दुर्बल |
दुरघटना | दुर्घटना |
शुद्ध वाक्य — केदारनाथ धाम का मार्ग अत्यन्त दुर्गम है।