प्रेमचंद की कहानियों में ग्रामीण व्यक्तितव जीवंत हो उठता है। वर्तनी की दृष्टि…
2026
प्रेमचंद की कहानियों में ग्रामीण व्यक्तितव जीवंत हो उठता है। वर्तनी की दृष्टि से दिए गए वाक्य के किस अंश में त्रुटि है?
Answer: A. ग्रामीण व्यक्तितव — अवधारणा: हिंदी में भाववाचक संज्ञा बनाने वाला ‘त्व’ प्रत्यय एक संयुक्त व्यंजन है — हलंत ‘त्’ के साथ ‘व’ मिलकर ‘त्व’ बनता है (त् + व = त्व)। इसीलिए ‘त्व’ को दो…
- A.
ग्रामीण व्यक्तितव
- B.
कहानियों में
- C.
प्रेमचंद की
- D.
जीवंत हो उठता है
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Correct answer: A
अवधारणा: हिंदी में भाववाचक संज्ञा बनाने वाला ‘त्व’ प्रत्यय एक संयुक्त व्यंजन है — हलंत ‘त्’ के साथ ‘व’ मिलकर ‘त्व’ बनता है (त् + व = त्व)।
इसीलिए ‘त्व’ को दो स्वतंत्र वर्णों ‘तव’ के रूप में लिखना वर्ण-विन्यास की त्रुटि है। वर्तनी जाँचते समय वाक्य के प्रत्येक अंश को उसके मानक शब्द-रूप से अलग-अलग मिलाया जाता है — प्रत्यय, अनुस्वार, तिर्यक बहुवचन और परसर्ग सभी स्वतंत्र रूप से देखे जाते हैं।
प्रयोग:
वाक्य को उसके चार अंशों में बाँटिए और प्रत्येक की तुलना मानक वर्तनी से कीजिए।
‘प्रेमचंद की’ — व्यक्तिवाचक संज्ञा ‘प्रेमचंद’ अनुस्वार सहित तथा संबंध कारक का परसर्ग ‘की’; मानक रूप यही है।
‘कहानियों में’ — ‘कहानी’ का बहुवचन तिर्यक रूप ‘कहानियों’ बनता है और उसके साथ परसर्ग ‘में’ आता है; मानक रूप यही है।
‘जीवंत हो उठता है’ — ‘जीवंत’ अनुस्वार सहित तथा संयुक्त क्रिया ‘हो उठता है’; मानक रूप यही है।
‘ग्रामीण व्यक्तितव’ — ‘व्यक्ति’ में ‘त्व’ प्रत्यय जोड़ने पर मानक रूप ‘व्यक्तित्व’ बनता है, जबकि वाक्य में हलंत लुप्त करके ‘व्यक्तितव’ लिखा गया है।
प्रति-परीक्षण:
वाक्य का अंश | मानक वर्तनी | टिप्पणी |
|---|---|---|
प्रेमचंद की | प्रेमचंद की | लिखित रूप मानक रूप के समान |
कहानियों में | कहानियों में | लिखित रूप मानक रूप के समान |
जीवंत हो उठता है | जीवंत हो उठता है | लिखित रूप मानक रूप के समान |
ग्रामीण व्यक्तितव | ग्रामीण व्यक्तित्व | ‘तव’ के स्थान पर संयुक्त वर्ण ‘त्व’ अपेक्षित |
अतः वर्तनी की त्रुटि ‘ग्रामीण व्यक्तितव’ अंश में है। शुद्ध वाक्य होगा — ‘प्रेमचंद की कहानियों में ग्रामीण व्यक्तित्व जीवंत हो उठता है।’