निर्देश : निम्नलिखित कविता को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सही/सबसे उपयुक्त…
2023
निर्देश : निम्नलिखित कविता को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
जिन्हें सपने अपने पाने हैं
बन जाते वे तो दीवाने हैं
गर लक्ष्य जो साधा है तूने
उसे पाने की कोशिश तू कर
चल आगे बढ़, तूफ़ानों से न डर ।
चल कश्ती उठा, सागर में उतर ।
है रात अँधेरी फ़िक्र है क्या
एक दिन आएगी अपनी सहर
चल कश्ती उठा, सागर में उतर ।
कविता की कौन-सी पंक्ति मनुष्य के मनोबल को बढ़ाती है ?
Answer: D. चल कश्ती उठा, सागर में उतर । — किसी कविता की जो पंक्ति पाठक को प्रत्यक्ष रूप से संबोधित करते हुए, आदेशात्मक क्रिया-रूप में, भय या बाधा के बावजूद तुरंत आगे बढ़ने के लिए कहती है, वह मनुष्य के…
- A.
गर लक्ष्य जो साधा है तूने ।
- B.
जिन्हें सपने अपने पाने हैं ।
- C.
एक दिन आएगी अपनी सहर ।
- D.
चल कश्ती उठा, सागर में उतर ।
Attempted by 7 students.
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Correct answer: D
किसी कविता की जो पंक्ति पाठक को प्रत्यक्ष रूप से संबोधित करते हुए, आदेशात्मक क्रिया-रूप में, भय या बाधा के बावजूद तुरंत आगे बढ़ने के लिए कहती है, वह मनुष्य के मनोबल को सबसे सीधे रूप में बढ़ाती है — शर्त बताने वाली, किसी का वर्णन करने वाली या भविष्य के प्रति आशा/भविष्यवाणी करने वाली पंक्तियाँ भी सकारात्मक भाव रखती हैं, परंतु वे मनोबल को उतने सीधे ढंग से नहीं बढ़ातीं जितना पाठक को सीधा कर्म करने का आह्वान करने वाली पंक्ति बढ़ाती है।
प्रस्तुत कविता में 'चल कश्ती उठा, सागर में उतर' पंक्ति आदेशात्मक क्रिया-रूपों — 'चल', 'उठा', 'उतर' — के माध्यम से पाठक को सीधे संबोधित करते हुए तूफ़ानों और अंधेरी रात के भय के बावजूद तुरंत आगे बढ़ने के लिए कहती है; यह पंक्ति उपरोक्त कसौटी को सबसे सीधे रूप में पूरा करती है, इसलिए यही मनोबल बढ़ाने वाली सबसे उपयुक्त पंक्ति है।
'गर लक्ष्य जो साधा है तूने' एक शर्त बताती है ('यदि लक्ष्य तय है'), जो पाठक को सीधे कोई कर्म करने के लिए नहीं कहती।
'जिन्हें सपने अपने पाने हैं' दीवानगी भरे स्वभाव वाले व्यक्तियों का वर्णन मात्र करती है, यह पाठक को सीधे संबोधित नहीं करती।
'एक दिन आएगी अपनी सहर' भविष्य के प्रति आशा और निश्चितता व्यक्त करती है, परंतु यह भी एक भविष्यवाणी है, पाठक को तत्काल कर्म हेतु दिया गया सीधा आदेश नहीं।
अतः तुलना करने पर स्पष्ट है कि पाठक को सीधे संबोधित करने वाली, आदेशात्मक कर्म-आह्वान की पंक्ति ही मनुष्य के मनोबल को सबसे सीधे रूप में बढ़ाती है।