इनमें से तद्भव-तत्सम का एक युग्म अशुद्ध है
2021
इनमें से तद्भव-तत्सम का एक युग्म अशुद्ध है
Answer: D. रहट – अरहट्ट — अवधारणातत्सम शब्द संस्कृत से अपने मूल रूप में लगभग अपरिवर्तित अवस्था में लिया जाता है। तद्भव शब्द प्राकृत, अपभ्रंश और बाद की हिंदी में नियमित ध्वनि-परिवर्तन…
- A.
ओस – अवश्याय
- B.
काढ़ा – क्वाथ
- C.
उबटन – उद्वर्तन
- D.
रहट – अरहट्ट
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Correct answer: D
अवधारणा
तत्सम शब्द संस्कृत से अपने मूल रूप में लगभग अपरिवर्तित अवस्था में लिया जाता है। तद्भव शब्द प्राकृत, अपभ्रंश और बाद की हिंदी में नियमित ध्वनि-परिवर्तन के माध्यम से संस्कृत के स्रोत-शब्द से विकसित होता है।
किसी युग्म की जाँच करने के लिए आधुनिक हिंदी रूप की तुलना ऐतिहासिक रूप से स्वीकृत संस्कृत स्रोत से करें; यदि स्रोत-रूप की वर्तनी गलत हो, तो केवल अर्थ-साम्य पर्याप्त नहीं है।
अनुप्रयोग
इस जाँच को प्रत्येक युग्म पर लागू करें और साझा अर्थ तथा मान्य स्रोत-रूप, दोनों का सत्यापन करें।
तद्भव रूप | मान्य तत्सम/स्रोत रूप | निष्कर्ष |
|---|---|---|
ओस | अवश्याय | दोनों का अर्थ ओस है। |
काढ़ा | क्वाथ | दोनों औषधीय काढ़े को सूचित करते हैं। |
उबटन | उद्वर्तन | आधुनिक रूप संस्कृत स्रोत से विकसित है। |
रहट | अरघट्ट | प्रस्तुत अरहट्ट में ‘घ’ व्यंजन नहीं है। |
तुलना और पुनः जाँच
ओस–अवश्याय में ओस के लिए मान्य शब्द-संबंध मिलता है।
काढ़ा–क्वाथ में औषधीय द्रव के लिए मान्य शब्द-संबंध मिलता है।
उबटन–उद्वर्तन में शरीर पर लगाए जाने वाले लेप का मान्य शब्द-संबंध मिलता है।
जल निकालने वाले यंत्र के लिए मान्य स्रोत-रूप अरघट्ट है; यह प्रस्तुत अरहट्ट से भिन्न है।
संदिग्ध युग्म की जाँच संस्कृत स्रोत में व्यंजन-समूह को पुनर्स्थापित करके की जा सकती है: अरघट्ट में ‘घ’ है, जबकि प्रस्तुत रूप अरहट्ट में यह ध्वनि लुप्त है। अन्य तीन प्रस्तुत स्रोत-रूप मानक कोशीय संगतियाँ हैं।
परिणाम
अतः गलत तद्भव–तत्सम युग्म रहट–अरहट्ट है।