लिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसपर आधारित प्रश्नों के सटीक उत्तर दीजिए।…
2023
लिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसपर आधारित प्रश्नों के सटीक उत्तर दीजिए।
मनुष्य ज्यों ही समाज में प्रवेश करता है. उसके सुख और दुःख का बहुत सा अंश दूसरे की क्रिया या अवस्था पर अवलंबित हो जाता है। उसके मनोविकारों के प्रवाह तथा जीवन के विस्तार के लिए अधिक क्षेत्र हो जाता है। वह दसरों के दुःख से दुखी और दुसरो सुख से सुखी होने लगता है।
Q. जीवन के विस्तार के लिए क्षेत्र की व्यापकता हो जाती है:
Answer: A. सामाजिक होते ही — सही उत्तर: सामाजिक होते ही समझाने का कारण: गद्यांश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि "मनुष्य ज्यों ही समाज में प्रवेश करता है, उसके सुख और दुःख का बहुत सा अंश…
- A.
सामाजिक होते ही
- B.
उपदेशक होते ही
- C.
शिक्षित होते ही
- D.
शिक्षक होते ही
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Correct answer: A
सही उत्तर: सामाजिक होते ही
समझाने का कारण: गद्यांश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि "मनुष्य ज्यों ही समाज में प्रवेश करता है, उसके सुख और दुःख का बहुत सा अंश दूसरे की क्रिया या अवस्था पर अवलंबित हो जाता है... जीवन के विस्तार के लिए अधिक क्षेत्र हो जाता है।" इसलिए जीवन के विस्तार के लिए क्षेत्र की व्यापकता का कारण समाज में प्रवेश करना है।
गद्यांश सीधे यह बताता है कि समाज में प्रवेश होते ही मनुष्य का जीवन अधिक व्यापक होता है।
अन्य विकल्पों जैसे उपदेशक, शिक्षित या शिक्षक होने का उल्लेख गद्यांश में जीवन के विस्तार के कारण के रूप में नहीं मिलता, इसलिए वे सही उत्तर नहीं हैं।