निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और–उसके आधार पर दिए गए प्रश्न का सही…

2023

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और–उसके आधार पर दिए गए प्रश्न का सही उत्तर दीजिए :

मनुष्य के लिए कविता प्रयोजनिय वस्तु है कि संसार की सभ्य–असभ्य सभी जातियों में, किसी–न–किसी रूप में पाई जाती है। चाहे इतिहास न हो, विज्ञान न हो, दर्शन न हो, पर कविता का प्रचार अवश्य रहेगा। बात यह है कि मनुष्य अपने ही व्यावहारों को ऐसा समझ और जटिल मण्डल बाँधता चला आ रहा है। जिसके भीतरी बन्ध–बन्ध वह शेष सृष्टि के साथ अपने हृदय का संबंध भूला–सा रहता है। इस परिवेश में मनुष्य को अपनी मानवता खोने का डर बराबर रहता है। इसी के अंतर्गत:–प्रकृति में मनुष्य को समय–समय पर जगाने रहने के लिए कविता मनुष्य जाति के साथ लगी चली आ रही है और लगी चली जाएगी। जानवरों को इसकी जरूरत नहीं।

मनुष्य को अपनी मानवता खोने का डर क्यों बना रहता है ?

Answer: A. शेष सृष्टि के साथ अपने हृदय का संबंध भूलने के कारणइस हृदय-संबंध की कमी ही मनुष्य को अपनी मानवता खोने का डर दिलाती है, इसलिए यह कारण पाठ में स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया है। अन्य विकल्प क्यों गलत हैं: शेष…

  1. A.

    शेष सृष्टि के साथ अपने हृदय का संबंध भूलने के कारण

  2. B.

    शेष सृष्टि के साथ अपना संबंध न बनाने के कारण

  3. C.

    इतिहास में ही रह जाने के कारण

  4. D.

    बौद्धिक प्रकृति में अधिक संलिप्त रहने के कारण

Attempted by 98 students.

Show answer & explanation

Correct answer: A

इस हृदय-संबंध की कमी ही मनुष्य को अपनी मानवता खोने का डर दिलाती है, इसलिए यह कारण पाठ में स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया है।

अन्य विकल्प क्यों गलत हैं: शेष सृष्टि के साथ अपना संबंध न बनाने के कारण — यह विकल्प भ्रमित कर सकता है; पर पाठ में emphasis यह है कि पहले से मौजूद हृदय-संबंध भूलना है, न कि कभी संबंध न बनना।

इतिहास में ही रह जाने के कारण — पाठ में इतिहास के होने न होने का उल्लेख कविता के प्रचार के सन्दर्भ में है, न कि इतिहास में फँसने से मानवता खोने के कारण के रूप में।

बौद्धिक प्रकृति में अधिक संलिप्त रहने के कारण — बौद्धिकता का संकेत है पर मुख्य कारण के रूप में पाठ ने हृदय का संबंध भूल जाना ही प्रस्तुत किया है, इसलिए यह प्राथमिक कारण नहीं है।

Explore the full course: Uppsc Polytechnic Lecturer 2025 Cs

Loading lesson…