इस प्रश्न में दो कथन I और II दिए गए हैं। ये कथन या तो स्वतंत्र कारण हो सकते…
2025
इस प्रश्न में दो कथन I और II दिए गए हैं। ये कथन या तो स्वतंत्र कारण हो सकते हैं या स्वतंत्र कारणों के प्रभाव या उभयनिष्ठ कारण हो सकते हैं। इनमें से एक कथन, दूसरे कथन का प्रभाव हो सकता है। दोनों कथनों को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए।
कथन:
I. कंपनी A में, कर्मचारी नौकरी के बढ़ते तनाव के बारे में शिकायत कर रहे हैं।
II. कंपनी A में कई कर्मचारी उच्च रक्तचाप का अनुभव कर रहे हैं।
Answer: A. कथन I कारण है और कथन II इसका संभावित प्रभाव है। — संकल्पना: कारण–प्रभाव कथनों की जोड़ी में दिशा तीन कसौटियों से तय होती है — (i) कालक्रम, अर्थात कारण पहले बनता है; (ii) तंत्र, अर्थात कोई ज्ञात प्रक्रिया एक को…
- A.
कथन I कारण है और कथन II इसका संभावित प्रभाव है।
- B.
I और II दोनों स्वतंत्र कारण हैं।
- C.
I और II दोनों स्वतंत्र कारणों के प्रभाव हैं।
- D.
कथन II कारण है और कथन I इसका संभावित प्रभाव है।
Attempted by 39 students.
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Correct answer: A
संकल्पना: कारण–प्रभाव कथनों की जोड़ी में दिशा तीन कसौटियों से तय होती है — (i) कालक्रम, अर्थात कारण पहले बनता है; (ii) तंत्र, अर्थात कोई ज्ञात प्रक्रिया एक को दूसरे तक ले जाती हो; और (iii) उलटी दिशा की प्रशंसनीयता। जब दोनों में से कोई भी दूसरे को जन्म नहीं दे सकता, तभी उन्हें स्वतंत्र कारण, स्वतंत्र कारणों के प्रभाव, या किसी उभयनिष्ठ कारण के प्रभाव माना जाता है।
अनुप्रयोग: कथन I में कंपनी A के कर्मचारी बढ़ते नौकरी-तनाव की शिकायत कर रहे हैं, और कथन II में उसी कंपनी के कई कर्मचारियों का रक्तचाप उच्च है। लंबे समय तक बना रहने वाला व्यावसायिक तनाव अनुकंपी तंत्रिका तंत्र को बार-बार सक्रिय करता है — कॉर्टिसोल और एड्रिनेलिन का स्तर बढ़ता है, हृदय-गति तेज होती है और रक्तवाहिकाओं का प्रतिरोध बढ़ता है, जिससे रक्तचाप ऊपर जाता है। कालक्रम भी यही कहता है: काम का दबाव पहले बढ़ता है, शारीरिक परिणाम बाद में सामने आते हैं।
प्रति-जाँच: कथनों के बीच संभव शेष संबंधों को इन्हीं कसौटियों पर परखिए —
रक्तचाप को कारण और तनाव की शिकायत को प्रभाव मानने पर दिशा उलट जाती है, पर बढ़ा हुआ रक्तचाप स्वयं एक शारीरिक परिणाम है — यह न काम का बोझ बढ़ाता है, न समय-सीमा कड़ी करता है और न संगठनात्मक दबाव पैदा करता है, इसलिए वह नौकरी-तनाव का जनक नहीं बन सकता।
दोनों को स्वतंत्र कारण मानने के लिए आवश्यक है कि उनके बीच कोई कारण-संबंध ही न हो, जबकि तनाव और रक्तचाप के बीच एक स्थापित शारीरिक मार्ग मौजूद है।
दोनों को स्वतंत्र कारणों का प्रभाव मानने के लिए दो भिन्न अनकहे कारण खोजने पड़ते हैं, जबकि एक कथन दूसरे को सीधे समझा देता है।
उभयनिष्ठ कारण की संभावना भी इसी तरह टिक नहीं पाती — उसमें कोई तीसरा कारक दोनों कथनों को अलग-अलग जन्म देता और वे उसके समानांतर प्रभाव होते; पर तनाव से रक्तचाप तक का सीधा मार्ग पहले से उपलब्ध है, इसलिए जोड़ी बिना किसी तीसरे कारक की कल्पना के ही समझ में आ जाती है।
निष्कर्ष: कथन I (बढ़ते नौकरी-तनाव की शिकायत) कारण है और कथन II (कर्मचारियों में उच्च रक्तचाप) उसका संभावित प्रभाव है।