निम्नलिखित में से हाइड्रोइलेक्ट्रिक विद्युत संयंत्र के कौन-कौन से प्रभाव हैं?…

2024

निम्नलिखित में से हाइड्रोइलेक्ट्रिक विद्युत संयंत्र के कौन-कौन से प्रभाव हैं?

A. भू-निम्नीकरण / अवक्रमण

B. सूक्ष्म-भूकंपता

C. ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन

D. जल प्रदूषण

E. धूम कोहरे का निर्माण

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Answer: A. केवल A, B, C और Dसंकल्पना — जलविद्युत संयंत्र किसी नदी को बांध के पीछे अवरुद्ध करके और गिरते हुए जल से टर्बाइन चलाकर विद्युत उत्पन्न करता है; इसमें किसी भी ईंधन का दहन नहीं…

  1. A.

    केवल A, B, C और D

  2. B.

    केवल A, C, D और E

  3. C.

    केवल A, B, D और E

  4. D.

    केवल B, C और E

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Correct answer: A

संकल्पना — जलविद्युत संयंत्र किसी नदी को बांध के पीछे अवरुद्ध करके और गिरते हुए जल से टर्बाइन चलाकर विद्युत उत्पन्न करता है; इसमें किसी भी ईंधन का दहन नहीं होता। अतः इसके पर्यावरणीय प्रभाव स्वयं जलाशय से उत्पन्न होते हैं—उसके द्वारा जलमग्न की गई भूमि, भूपर्पटी पर डाला गया भार और रंध्र-जल दाब, जलमग्न किया गया जैवभार तथा परिवर्तित जल-रसायन—और दहन-उत्पादों से कभी नहीं।

अनुप्रयोग — इस सिद्धांत को प्रश्न में सूचीबद्ध प्रत्येक प्रभाव पर लागू करने पर:

  • भू-निम्नीकरण: जलाशय वन और कृषि-भूमि को जलमग्न कर देता है, उसकी परिधि के आसपास जलभराव और लवणीकरण विकसित होते हैं, तथा बांध अवसाद को रोक लेता है, जिससे अवसाद-वंचित नदी अनुप्रवाह में अपने तटों और तल का अपरदन करती है।

  • सूक्ष्म-भूकंपता: अवरुद्ध जल का भार, अंतर्निहित भ्रंशों के साथ रंध्र-जल दाब में वृद्धि के साथ मिलकर, छोटे भूकंपीय झटके उत्पन्न करता है—इसे जलाशय-प्रेरित भूकंपता कहते हैं, जिसका भारत में पहली बार 1967 में कोयना में प्रलेखन किया गया था।

  • ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन: जलाशय द्वारा जलमग्न की गई वनस्पति और मृदा का कार्बनिक पदार्थ ऑक्सीजन के बिना अपघटित होता है, जिससे जलाशय की सतह, टर्बाइनों और उत्प्लव मार्ग से मीथेन तथा कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित होती हैं।

  • जल प्रदूषण: स्थिर जलाशय में स्तरीकरण होता है और घुलित ऑक्सीजन घटती है, पोषक तत्त्व संचित होकर सुपोषण उत्पन्न करते हैं, जलमग्न मृदाओं में पारे का मिथाइलीकरण होता है, तथा अनुप्रवाह में तापमान, आविलता और घुलित-ऑक्सीजन की व्यवस्थाएँ परिवर्तित हो जाती हैं।

  • धूम कोहरे का निर्माण: धूम कोहरे को, चाहे वह पारंपरिक सल्फरयुक्त हो या प्रकाश-रासायनिक, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन के ऑक्साइड, वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों और कणिकीय पदार्थों की आवश्यकता होती है, जो ईंधन के दहन पर उत्सर्जित होते हैं। जलविद्युत संयंत्र में कोई दहन नहीं होता और इसलिए वह इनमें से किसी भी पूर्वगामी पदार्थ की आपूर्ति नहीं करता।

प्रति-जाँच — लागू होने वाला प्रत्येक प्रभाव जलाशय से संबद्ध है, जबकि लागू न होने वाले एकमात्र प्रभाव के लिए दहन आवश्यक है। ठीक इसी कारण जलविद्युत को तापविद्युत के कम-उत्सर्जन वाले विकल्प के रूप में प्रोत्साहित किया जाता है, यद्यपि उसका जलाशय ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन करता है।

परिणाम — सूचीबद्ध प्रभावों में जलविद्युत संयंत्र के प्रभाव भू-निम्नीकरण, सूक्ष्म-भूकंपता, ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन और जल प्रदूषण हैं—अर्थात् संयोजन “केवल A, B, C और D”।

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