‘सव्यभिचार (अनैकान्तिक मध्य पद)’ तर्कदोष के बारे में निम्नलिखित में से क्या…

2024

‘सव्यभिचार (अनैकान्तिक मध्य पद)’ तर्कदोष के बारे में निम्नलिखित में से क्या कहा जा सकता है?

Answer: D. यह किसी एक निश्चित निष्कर्ष को स्थापित नहीं करता और भिन्न अथवा परस्पर-विरोधी निष्कर्षों की गुंजाइश छोड़ सकता है।संकल्पनान्याय-अनुमान में वैध मध्यपद (हेतु) का साध्य के साथ अविनाभाव-संबंध (व्याप्ति) स्थापित होना आवश्यक है। सव्यभिचार या अनैकान्तिक हेतु में यह अनिवार्य…

  1. A.

    यह एकल निष्कर्ष में फलित होता है।

  2. B.

    इसमें हेतु विधेय पद के साथ समरूपता से नियत होता है।

  3. C.

    इसमें हेतु केवल विधेय पद के अन-अस्तित्व से संबंधित है।

  4. D.

    यह किसी एक निश्चित निष्कर्ष को स्थापित नहीं करता और भिन्न अथवा परस्पर-विरोधी निष्कर्षों की गुंजाइश छोड़ सकता है।

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Correct answer: D

संकल्पना

न्याय-अनुमान में वैध मध्यपद (हेतु) का साध्य के साथ अविनाभाव-संबंध (व्याप्ति) स्थापित होना आवश्यक है। सव्यभिचार या अनैकान्तिक हेतु में यह अनिवार्य संबंध स्थापित नहीं होता; इसलिए हेतु साध्य को निर्णायक रूप से सिद्ध नहीं कर पाता।

अनुप्रयोग

सव्यभिचार के उपप्रकारों में व्याप्ति की विफलता अलग-अलग ढंग से दिखाई दे सकती है। इसलिए ऐसा मध्यपद किसी एक निश्चित निष्कर्ष को स्थापित नहीं करता और भिन्न अथवा परस्पर-विरोधी निष्कर्षों की गुंजाइश छोड़ सकता है। इसका अर्थ यह नहीं कि हर उपप्रकार वस्तुतः विरोधी निष्कर्षों की एक जोड़ी उत्पन्न करता है।

भेद

  • एक निश्चित निष्कर्ष के लिए मध्यपद और सिद्ध किए जाने वाले धर्म के बीच अपरिवर्ती संबंध आवश्यक होता है।

  • केवल विधेय से समानता सव्यभिचार की परिभाषा नहीं है।

  • केवल विधेय के अभाव तक सीमित संबंध हेतु और साध्य के बीच एक अलग प्रकार का संबंध बताता है।

परिणाम

अतः सव्यभिचार किसी एक निश्चित निष्कर्ष को स्थापित नहीं करता और भिन्न अथवा परस्पर-विरोधी निष्कर्षों की गुंजाइश छोड़ सकता है।

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