अनुच्छेद के अनुसार, उन्नीसवीं शताब्दी में सबसे महत्वपूर्ण साहित्यिक परिघटना…
2024
अनुच्छेद के अनुसार, उन्नीसवीं शताब्दी में सबसे महत्वपूर्ण साहित्यिक परिघटना क्या थी?
Answer: C. आधुनिक भारतीय भाषाओं में साहित्यिक गद्य का उद्भव — संकल्पना — जो प्रश्न यह पूछता है कि गद्यांश के अनुसार क्या सत्य है, उसका निर्णय केवल गद्यांश में किए गए कथन के आधार पर होता है; बाहरी ज्ञान और केवल संभाव्य…
- A.
काव्यात्मक शैलियों का आविष्कार
- B.
नाटक का विकास
- C.
आधुनिक भारतीय भाषाओं में साहित्यिक गद्य का उद्भव
- D.
विदेशी साहित्य का अनुवाद
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Correct answer: C
संकल्पना — जो प्रश्न यह पूछता है कि गद्यांश के अनुसार क्या सत्य है, उसका निर्णय केवल गद्यांश में किए गए कथन के आधार पर होता है; बाहरी ज्ञान और केवल संभाव्य प्रतीत होने वाले विचारों का कोई महत्त्व नहीं होता। विवरणात्मक अनुच्छेद में लेखक का मुख्य दावा सामान्यतः आरंभिक विषय-वाक्य में होता है और उसके बाद के वाक्य उसे सीमित करते हैं, उससे भिन्नता स्पष्ट करते हैं या उसे उदाहरणों से समझाते हैं। अतः विधि यह है कि विषय-वाक्य को पहचाना जाए, उसमें किए गए दावे को पढ़ा जाए और फिर जाँचा जाए कि अनुच्छेद का शेष भाग उसी दावे के इर्द-गिर्द व्यवस्थित है।
अनुप्रयोग — अनुच्छेद अपने विषय का उल्लेख करते हुए आरंभ होता है—उन्नीसवीं शताब्दी की सबसे महत्त्वपूर्ण साहित्यिक परिघटना—और उसकी पहचान सभी आधुनिक भारतीय भाषाओं में साहित्यिक गद्य के उदय के रूप में करता है। इसके बाद लेखक तुरंत इस दावे की संभावित गलत व्याख्या का निराकरण करता है: गद्य का आविष्कार स्वयं इस काल में नहीं हुआ था, क्योंकि संस्कृत और फ़ारसी में पहले से ही उसका विशाल भंडार विद्यमान था। अतः उन्नीसवीं शताब्दी में नया तत्त्व गद्य का रूप नहीं, बल्कि वे भाषाएँ थीं जिनमें अब गद्य लिखा जा रहा था, अर्थात् आधुनिक भारतीय भाषाएँ।
पुनःपरीक्षण — दिए गए प्रत्येक विकल्प की तुलना में अनुच्छेद के अपने साक्ष्य का मूल्यांकन:
काव्यात्मक शैलियों का आविष्कार: अनुच्छेद में उल्लिखित प्रत्येक साहित्यिक उपलब्धि गद्य से संबंधित है—संस्कृत की सरल और गरिमामयी गद्य-शैली, फ़ारसी का गंभीर और विद्वत्तापूर्ण गद्य तथा पाली और प्राकृत की गद्य-कथाएँ। इसमें कहीं भी किसी पद्य-विधा की चर्चा नहीं की गई है।
नाटक का विकास: अनुच्छेद में न किसी नाटक, न किसी नाटककार और न ही किसी रंगमंचीय विधा का उल्लेख है; इसमें जिन परंपराओं का क्रमिक वर्णन किया गया है, वे संस्कृत गद्य से पाली और प्राकृत की कथाओं तथा रोमांसों तक जाती हैं।
विदेशी साहित्य का अनुवाद: अरेबियन नाइट्स कथा-चक्र का उल्लेख अवश्य है, किंतु ऐसे प्रभाव के रूप में जिसने फ़ारसी गद्य के लिए सृजनात्मक कल्पना की संभावना खोली, न कि उन्नीसवीं शताब्दी के किसी अनुवाद आंदोलन के रूप में।
आधुनिक भारतीय भाषाओं में साहित्यिक गद्य का उदय: आरंभिक वाक्य ठीक यही दावा करता है और अनुच्छेद का शेष भाग इसी दावे को स्पष्ट करने तथा उसका समर्थन करने के लिए है।
अतः गद्यांश उन्नीसवीं शताब्दी की जिस परिघटना को सबसे महत्त्वपूर्ण बताता है, वह सभी आधुनिक भारतीय भाषाओं में साहित्यिक गद्य का उदय है।