निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प…
2019
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चिह्नित कीजिए :
हमारे व्यावहारिक अथवा वास्तविक जीवन में भी यही सिद्धांत काम करता है कि हम समाज अथवा लोगों को जो देते हैं वही हमारे पास लौटकर आता है। हम लोगों से प्यार करते हैं तो लोग भी हमें प्यार करते हैं लेकिन यदि हम लोगों से घृणा करते हैं तो वे भी हमसे घृणा ही करेंगे इसमें संदेह नहीं। यदि हम सबके साथ सहयोग करते हैं अथवा ईमानदार बने रहते हैं तो दूसरे भी हमारे प्रति सहयोगात्मक और ईमानदार हो जाते हैं। इसे आकर्षण का नियम कहा गया है। हम जैसा स्वभाव विकसित कर लेते हैं वैसी ही चीजें हमारी ओर आकर्षित होती हैं। गंदगी मक्खी को आकर्षित करती है, फूल तितली को आकर्षित करते हैं। यदि हम स्वयं को फूल जैसा सुंदर, सुवासित, मधुर व रंगीन अर्थात सुंदर गुणों से युक्त बना लें तो स्वाभाविक है कि समाज के सुंदर गुणी व्यक्ति हमारी ओर आकर्षित होंगे ही।
यदि हम चाहते हैं कि हमारे संपर्क में केवल अच्छे लोग ही आएं तो हमें स्वयं को उनके अनुरूप बनाना होगा — दुर्गुणों में नहीं, सद्गुणों में। अपने व्यवहार को व्यवस्थित व आदतों को अच्छा करना होगा। अपनी वाणी को कोमल व मधुर बनाना होगा। केवल मात्र बाहर से नहीं, मन की गहराइयों में स्वयं को सुंदर बनाना होगा। यदि हम बाहरी रूप-स्वरूप से नहीं, वरन् मन से सुंदर बन पाते हैं तो विचार और कर्म स्वयं सुंदर हो जाएंगे। जीवन रूपी सितार ठीक बजने लगेगा। जीवन के प्रति सत्यम्, शिवम् और सुंदरम् का आकर्षण बढ़ने लगेगा।
हमारे व्यवहार और कार्य स्वयं ठीक हो जाएंगे यदि हम
Answer: D. बाहर से ही नहीं, भीतर से भी अच्छे बनें। — अपठित गद्यांश आधारित प्रश्नों में वही विकल्प सही माना जाता है जो गद्यांश में लिखे गए वाक्य से शब्दशः और तर्कसंगत रूप से मेल खाता हो — कोई सामान्य निष्कर्ष,…
- A.
वीणा और वाणी से मधुर स्वर निकालें।
- B.
सुखी जीवन व्यतीत करें।
- C.
सबसे अच्छा व्यवहार करें।
- D.
बाहर से ही नहीं, भीतर से भी अच्छे बनें।
Attempted by 8 students.
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Correct answer: D
अपठित गद्यांश आधारित प्रश्नों में वही विकल्प सही माना जाता है जो गद्यांश में लिखे गए वाक्य से शब्दशः और तर्कसंगत रूप से मेल खाता हो — कोई सामान्य निष्कर्ष, आंशिक उत्तर या रूपक का शाब्दिक अर्थ नहीं, बल्कि प्रश्न में पूछे गए कारण-परिणाम संबंध की सीधी पुष्टि गद्यांश के कथन से होनी चाहिए।
गद्यांश के दूसरे अनुच्छेद के अंत में स्पष्ट कहा गया है — 'यदि हम बाहरी रूप-स्वरूप से नहीं, वरन् मन से सुंदर बन पाते हैं तो विचार और कर्म स्वयं सुंदर हो जाएंगे।' प्रश्न में पूछा गया है कि हमारा व्यवहार और कार्य किस स्थिति में स्वयं ठीक हो जाएगा; गद्यांश की यह पंक्ति सीधे बताती है कि यह तभी होगा जब हम केवल बाहरी रूप से ही नहीं, बल्कि भीतर से भी अच्छे बनें — अर्थात आंतरिक व बाह्य दोनों रूपों में अच्छा बनना ही इसका उत्तर है।
वीणा और वाणी से मधुर स्वर निकालना — यह गद्यांश की अंतिम पंक्ति के 'जीवन रूपी सितार ठीक बजने लगेगा' रूपक से लिया गया एक बिंब मात्र है, यह स्वयं कोई कारण नहीं बताता जिससे व्यवहार ठीक हो।
सुखी जीवन व्यतीत करना — यह आकर्षण के नियम से मिलने वाला दीर्घकालीन प्रभाव है (जैसे प्रेम व सहयोग का प्रत्युत्तर मिलना), न कि वह शर्त जो व्यवहार व कर्म को स्वयं ठीक करती है।
सबसे अच्छा व्यवहार करना — यह प्रश्न में पूछे गए परिणाम (अच्छा व्यवहार) का ही दोहराव है; प्रश्न इस परिणाम के पीछे का कारण पूछता है, स्वयं परिणाम नहीं।
अतः गद्यांश के स्पष्ट कथन के आधार पर, भीतर से भी अच्छा बनना ही वह शर्त है जिससे व्यवहार और कार्य स्वयं ठीक होते हैं।