उच्च प्राथमिक स्तर पर बच्चों की सृजनात्मक अभिव्यक्ति की दृष्टि से कौन–सा…

2021

उच्च प्राथमिक स्तर पर बच्चों की सृजनात्मक अभिव्यक्ति की दृष्टि से कौन–सा प्रश्न सर्वाधिक प्रभावी है?

Answer: D. घर में बातचीत करके घर में बनने वाले पकवानों के बनने की प्रक्रिया बताइए।अवधारणा: किसी कक्षा-प्रश्न का मूल्यांकन इस आधार पर किया जाता है कि वह बच्चे से किस स्तर का भाषिक कार्य कराता है। पाठ में दी गई सूचना को याद करना, खोजना या…

  1. A.

    खानपान के मामले में स्थानीयता का क्या अर्थ है?

  2. B.

    खानपान में बदलाव के कौन–से फायदे हैं?

  3. C.

    लेखक खानपान में बदलाव को लेकर चिंतित क्यों है?

  4. D.

    घर में बातचीत करके घर में बनने वाले पकवानों के बनने की प्रक्रिया बताइए।

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Correct answer: D

अवधारणा: किसी कक्षा-प्रश्न का मूल्यांकन इस आधार पर किया जाता है कि वह बच्चे से किस स्तर का भाषिक कार्य कराता है। पाठ में दी गई सूचना को याद करना, खोजना या समझाना (शब्दार्थ, तथ्य-सूची, लेखक का दृष्टिकोण) स्मृति/बोध-स्तर का कार्य है; जबकि ऐसा प्रश्न जो बच्चे को अपने निजी अनुभव, संवाद और अवलोकन के आधार पर स्वयं नई भाषिक सामग्री गढ़ने—वर्णन करने, क्रम से बताने—को प्रेरित करे, वही सृजनात्मक अभिव्यक्ति को वास्तव में विकसित करता है।

अनुप्रयोग: दिए गए चार प्रश्नों में से पहले तीन (स्थानीयता का अर्थ, खानपान-बदलाव के फायदे, लेखक की चिंता का कारण) सभी पाठ में उपलब्ध सूचना को याद करने या समझाने तक सीमित हैं—बच्चे को उत्तर पाठ से मिल जाता है। चौथा प्रश्न बच्चे को घर के सदस्यों से बातचीत करके, अपने निजी अनुभव के आधार पर, पकवान बनने की प्रक्रिया को अपने शब्दों में क्रमबद्ध ढंग से वर्णित करने को कहता है—यह उत्तर कहीं लिखा नहीं मिलता, बच्चे को स्वयं भाषा में रचना करनी पड़ती है।

तुलना:

  • स्थानीयता का अर्थ पूछना — शब्दार्थ स्मरण, कोई नई रचना नहीं।

  • खानपान-बदलाव के फायदे पूछना — पाठ से तथ्य खोजकर सूचीबद्ध करना, बोध-स्तर।

  • लेखक की चिंता का कारण पूछना — पाठ की व्याख्या, बोध-स्तर।

  • घर में बातचीत करके पकवान बनने की प्रक्रिया बताना — व्यक्तिगत अनुभव और संवाद पर आधारित मौलिक वर्णन, सृजनात्मक-स्तर।

निष्कर्ष: अतः घर में बातचीत करके पकवान बनने की प्रक्रिया बताने वाला प्रश्न ही बच्चों की सृजनात्मक अभिव्यक्ति के लिए सर्वाधिक प्रभावी है, क्योंकि यह उन्हें निजी अनुभव के आधार पर स्वतंत्र, वर्णनात्मक भाषा रचने का अवसर देता है (एनसीएफ़ 2005 द्वारा अनुशंसित अनुभव-आधारित, सृजनात्मक भाषा-शिक्षण उपागम के अनुरूप)।

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