निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प…
2019
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :
हमारे देश में एक ऐसा भी युग था जब नैतिक और आध्यात्मिक विकास ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य माना जाता था । अहिंसा की भावना सर्वोपरि थी । आज पूरा जीवन-दर्शन ही बदल गया है । सर्वत्र पैसे की हाय-हाय तथा धन का उपार्जन ही मुख्य ध्येय हो गया है, भले ही धन-उपार्जन के तरीके गलत ही क्यों न हों । इन सबका असर मनुष्य के प्रतिदिन के जीवन पर पड़ रहा है । समाज का वातावरण दूषित हो गया है । इन सबके कारण मानसिक और शारीरिक तनाव-खिंचाव और व्याधियाँ पैदा हो रही हैं ।
आज आदमी धन के पीछे अंधाधुंध दौड़ रहा है । पाँच रुपये मिलने पर दस, दस मिलने पर सौ और सौ मिलने पर हज़ार की लालसा लिए वह इस अंधी दौड़ में शामिल है । इस दौड़ का कोई अंत नहीं । धन की इस दौड़ में सभी पारिवारिक और मानवीय संबंध पीछे छूट गए । व्यक्ति सत्य-असत्य, उचित-अनुचित, न्याय-अन्याय और अपने-पराए के भेद-भाव को भूल गया । उसके पास अपनी पत्नी और संतान के लिए भी समय नहीं । धन के लिए पुत्र का पिता के साथ, बेटी का माँ के साथ और पति का पत्नी के साथ झगड़ा हो रहा है । भाई-भाई के खून का प्यासा है । धन की लालसा व्यक्ति को जघन्य से जघन्य कार्य करने के लिए उकसा रही है । इस लालसा का ही परिणाम है कि जगह-जगह हत्या, लूट, अपहरण और चोरी-डकैती की घटनाएँ बढ़ रही हैं । इस रोगी मनोवृत्ति को बदलने के लिए हमें हर स्तर पर प्रयत्न करने होंगे ।
'जघन्य' शब्द का अर्थ नहीं है -
Answer: D. जाँघ से संबंधित — मानक शब्दार्थ (पर्यायवाची/असंगत-अर्थ) आधारित प्रश्नों में किसी शब्द के शब्दकोश-सम्मत सभी प्रचलित अर्थों को पहचानकर यह तय करना होता है कि दिए गए विकल्पों में…
- A.
निंदित
- B.
निकृष्ट
- C.
त्याग देने योग्य
- D.
जाँघ से संबंधित
Attempted by 7 students.
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Correct answer: D
मानक शब्दार्थ (पर्यायवाची/असंगत-अर्थ) आधारित प्रश्नों में किसी शब्द के शब्दकोश-सम्मत सभी प्रचलित अर्थों को पहचानकर यह तय करना होता है कि दिए गए विकल्पों में से कौन-सा अर्थ उस शब्द का वास्तविक शब्दकोशीय अर्थ नहीं है; शब्द की व्युत्पत्ति (मूल उत्पत्ति) पर आधारित निकटवर्ती-सा प्रतीत होने वाला अर्थ आवश्यक नहीं कि शब्दकोश में मान्य प्रचलित अर्थ भी हो।
'जघन्य' शब्द के मानक शब्दकोशीय अर्थ हैं — निकृष्ट/नीच (जैसे 'जघन्य अपराध' = अत्यंत निकृष्ट अपराध), निंदित/निंदनीय (घृणा के योग्य) तथा त्याज्य अर्थात् त्याग देने योग्य (अत्यंत हेय होने के कारण त्यागने योग्य)। ये तीनों अर्थ मानक हिंदी शब्दकोशों में 'जघन्य' के पर्याय के रूप में दर्ज हैं। इसके विपरीत 'जाँघ से संबंधित' 'जघन्य' का शब्दकोशीय अर्थ नहीं है — यद्यपि यह शब्द संस्कृत मूल 'जघन' (कटि/जाँघ-प्रदेश) से व्युत्पन्न है, वर्तमान हिंदी शब्दकोशों में इस व्युत्पत्ति के आधार पर कोई स्वतंत्र प्रचलित अर्थ स्वीकृत नहीं है।
निंदित — 'जघन्य' का मान्य पर्याय है (घृणा एवं निंदा के योग्य); अतः यह वह अर्थ नहीं है जो शब्द का अर्थ न हो।
निकृष्ट — 'जघन्य' का सर्वाधिक प्रचलित शब्दकोशीय अर्थ है (जैसे 'जघन्य अपराध'); अतः यह भी शब्द का वास्तविक अर्थ है।
त्याग देने योग्य (त्याज्य) — यह भी 'जघन्य' का मान्य शब्दकोशीय अर्थ है; अतः यह भी वह अर्थ नहीं है जो शब्द का अर्थ न हो।
जाँघ से संबंधित — केवल व्युत्पत्ति-मूलक साम्य है, शब्दकोश में यह 'जघन्य' का मान्य/प्रचलित अर्थ नहीं है; अतः यही सही उत्तर है।
सीटीईटी (दिसंबर 2019, पेपर-2) की आधिकारिक उत्तर कुंजी में भी इसी विकल्प को सही उत्तर के रूप में स्वीकृत किया गया है, जो उपर्युक्त शब्दकोशीय विश्लेषण की पुष्टि करता है।