निम्नलिखित में से कौन-से क्षेत्र अशोक के साम्राज्य का हिस्सा थे, जहाँ मौर्य…

2025

निम्नलिखित में से कौन-से क्षेत्र अशोक के साम्राज्य का हिस्सा थे, जहाँ मौर्य शासन के पतन के बाद स्वतंत्र राज्यों का उदय हुआ?

Answer: D. दक्‍कन और कलिंगअवधारणाजब किसी विशाल, केंद्रीय रूप से प्रशासित साम्राज्य की सत्ता का पतन हो जाता है, तब उसके प्रत्यक्ष नियंत्रण में रहे अथवा हाल ही में उसके द्वारा अधिगृहीत…

  1. A.

    कलिंग और बंगाल

  2. B.

    दक्‍कन और गुजरात

  3. C.

    गुजरात और राजस्थान

  4. D.

    दक्‍कन और कलिंग

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Correct answer: D

अवधारणा

जब किसी विशाल, केंद्रीय रूप से प्रशासित साम्राज्य की सत्ता का पतन हो जाता है, तब उसके प्रत्यक्ष नियंत्रण में रहे अथवा हाल ही में उसके द्वारा अधिगृहीत प्रदेश एकीकृत नहीं रहते—उत्पन्न सत्ता-शून्यता को भरने के लिए वहाँ क्षेत्रीय राजवंशों का उदय होता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ साम्राज्य की प्रशासनिक या सैन्य उपस्थिति अभिलेखीय रूप से प्रमाणित रही हो।

अनुप्रयोग

अशोक का मौर्य साम्राज्य एक प्रांतीय केंद्र के माध्यम से दक्कन क्षेत्र का प्रशासन करता था और उसने कलिंग युद्ध (लगभग 261 ईसा-पूर्व) के बाद कलिंग का अधिग्रहण किया था। केंद्रीय मौर्य सत्ता के पतन के पश्चात्—जिसकी पारंपरिक तिथि अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ को लगभग 185 ईसा-पूर्व में अपदस्थ किए जाने से निर्धारित की जाती है—इन्हीं दो क्षेत्रों में क्षेत्रीय राजवंश सत्तारूढ़ हुए: दक्कन में सातवाहन और कलिंग में राजा खारवेल के अधीन चेदि राजवंश, जिसका उल्लेख हाथीगुम्फा अभिलेख में मिलता है। यह मानक पाठ्यपुस्तकीय विवरण है—उदाहरणार्थ, एनआईओएस के ‘मौर्योत्तर विकास’ में—जो दक्कन और कलिंग की पहचान उन तात्कालिक मौर्योत्तर उत्तराधिकारी क्षेत्रों की जोड़ी के रूप में करता है, जिनके विषय में प्रश्न पूछा गया है।

क्रॉस-चेक

मानक विवरण में अपेक्षित दो शर्तों—अशोक के साम्राज्य का भाग होना और उसी विवरण में उल्लिखित तात्कालिक मौर्योत्तर उत्तराधिकारी राज्यों में से किसी एक का केंद्र होना—के आधार पर प्रत्येक युग्म की जाँच:

  • कलिंग और बंगाल—कलिंग मानक विवरण के अनुरूप है, किंतु बंगाल (वंग) उस तात्कालिक उत्तराधिकारी-विवरण का भाग नहीं है; उसके प्रमुख क्षेत्रीय राजवंश बाद के काल से संबंधित हैं।

  • दक्कन और गुजरात—दक्कन मानक विवरण के अनुरूप है, किंतु गुजरात (सौराष्ट्र) उस विवरण के तात्कालिक उत्तराधिकारी-विवरण का भाग नहीं है; उसके उल्लेखनीय स्वतंत्र राजनीतिक इतिहास को बाद के काल में रखा जाता है।

  • गुजरात और राजस्थान—मानक विवरण में दोनों में से कोई भी क्षेत्र तात्कालिक मौर्योत्तर उत्तराधिकारी क्षेत्र के रूप में उल्लिखित नहीं है।

  • दक्कन और कलिंग—दोनों क्षेत्र मानक विवरण में तात्कालिक मौर्योत्तर उत्तराधिकारी राज्यों—सातवाहन तथा खारवेल के अधीन चेदि—के केंद्रों के रूप में उल्लिखित हैं; अतः यही अभिप्रेत युग्म सिद्ध होता है।

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