निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प…
2019
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :
शिक्षा मनुष्य को मस्तिष्क और शरीर का उचित तालमेल करना सिखाती है । वह शिक्षा जो मानव को पाठ्य-पुस्तकों के ज्ञान के अतिरिक्त कुछ गंभीर चिंतन न दे । यदि हमारी शिक्षा सुसंस्कृत, सभ्य, सच्चरित्र एवं अच्छे नागरिक नहीं बना सकती तो उससे क्या लाभ ? सहृदय, सच्चा परंतु अनपढ़ मज़दूर उस स्नातक से कहीं अच्छा है जो निर्दयी और चरित्रहीन है । संसार के सभी वैभव और सुख-साधन भी मनुष्य को तब तक सुखी नहीं बना सकते जब तक कि मनुष्य को आत्मिक ज्ञान न हो । हमारे कुछ अधिकार और कर्तव्य भी हैं । शिक्षित व्यक्ति को कर्तव्यों का उतना ही ध्यान रखना चाहिए जितना कि अधिकारों का ।
वह अशिक्षित शिक्षित व्यक्ति से अच्छा है जो –
Answer: A. दयालु और सच्चरित्र हो। — अपठित गद्यांश पर आधारित पूर्ति-प्रकार के प्रश्नों में दिया गया अधूरा वाक्य गद्यांश द्वारा स्पष्ट रूप से बताए गए मूल्य-निर्णय — अर्थात तुलना किस गुण के आधार पर…
- A.
दयालु और सच्चरित्र हो।
- B.
गंभीर चिंतन दे।
- C.
अपने अधिकार जानता हो।
- D.
मस्तिष्क का सही उपयोग करता हो।
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Correct answer: A
अपठित गद्यांश पर आधारित पूर्ति-प्रकार के प्रश्नों में दिया गया अधूरा वाक्य गद्यांश द्वारा स्पष्ट रूप से बताए गए मूल्य-निर्णय — अर्थात तुलना किस गुण के आधार पर की जा रही है — से मिलाकर पूर्ण किया जाता है, केवल सतही शब्द-साम्य से नहीं।
गद्यांश स्पष्ट रूप से कहता है कि 'सहृदय, सच्चा परंतु अनपढ़ मज़दूर उस स्नातक से कहीं अच्छा है जो निर्दयी और चरित्रहीन है' — अर्थात यहाँ तुलना का आधार शिक्षा नहीं, बल्कि दयालुता और सच्चरित्रता है। यही भाव गद्यांश के पिछले वाक्य में भी आ चुका है ('यदि हमारी शिक्षा...सच्चरित्र...नहीं बना सकती तो उससे क्या लाभ')। अतः प्रश्न का अधूरा वाक्य 'वह अशिक्षित शिक्षित व्यक्ति से अच्छा है जो –' उसी गुण से पूर्ण होगा जिसे गद्यांश तुलना के आधार के रूप में बताता है, अर्थात 'दयालु और सच्चरित्र हो'। चारों विकल्पों में से केवल यही विकल्प वह विशिष्ट गुण बताता है जिसे गद्यांश तुलना का आधार मानता है; शेष तीन विकल्प गद्यांश के किसी अन्य भाग से जुड़े हैं।
यह निष्कर्ष आधिकारिक CTET दिसम्बर 2019 पेपर 2 उत्तर कुंजी से भी पुष्ट होता है।
'गंभीर चिंतन दे' — यह कथन गद्यांश के शिक्षा-परिभाषा वाले वाक्य से लिया गया है, जो तुलना वाले वाक्य से भिन्न है।
'अपने अधिकार जानता हो' — यह गद्यांश के अधिकार-कर्तव्य वाले वाक्य से जुड़ा है, अनपढ़-शिक्षित तुलना से नहीं।
'मस्तिष्क का सही उपयोग करता हो' — यह गद्यांश के आरंभिक वाक्य से लिया गया है, जो शिक्षा की सामान्य भूमिका बताता है, तुलना वाला वाक्य नहीं।