निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सही/सबसे उपयुक्त…
2023
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
कहते हैं मनुष्य ने नौ से दस हज़ार साल पहले बौद्धिक दृष्टिकोण की खोज की थी । वह भक्ति मार्ग था । मानव इतिहास के इस दौर के लोग सबसे बुद्धिमान थे । मैंने पहले ही कहा है कि आध्यात्मिक दुनिया का महत्त्व बहुत अधिक है । फिर भी सापेक्ष दुनिया पूरी तरह से महत्त्वहीन नहीं है । जब सुदूर अतीत में मनुष्यों ने महसूस किया कि कर्म योग और ज्ञान योग उन्हें सच्ची प्रगति प्राप्त करने में मदद नहीं करेंगे, तो उन्होंने तुरंत भक्ति योग को अपना लिया ।
उन्होंने अनुभव किया कि भक्ति ही उनके लिए एकमात्र मार्ग है । मनुष्य आज अपने विकसित कर्म और ज्ञान योग के कारण और भी आगे बढ़ गया है । इस प्रकार अपने पूर्वजों की तुलना में वह भक्ति के मार्ग पर चलने की आवश्यकता को अधिक तेज़ी से महसूस करेगा । यह कर्म और ज्ञान योग का उज्ज्वल पक्ष है । यानी ये दोनों योग भक्ति मार्ग को और मज़बूत करेंगे ।
मनुष्य के पूर्वजों ने किस चीज़ की आवश्यकता को नहीं समझा था ?
Answer: D. मानसिक विकास की — अवधारणा: अपठित गद्यांश आधारित प्रश्नों में यह परखा जाता है कि गद्यांश में किस विचार की चर्चा स्पष्ट रूप से की गई है और किसका कोई उल्लेख ही नहीं मिलता । जब…
- A.
ज्ञान मार्ग की
- B.
भक्ति मार्ग की
- C.
कर्म मार्ग की
- D.
मानसिक विकास की
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Correct answer: D
अवधारणा: अपठित गद्यांश आधारित प्रश्नों में यह परखा जाता है कि गद्यांश में किस विचार की चर्चा स्पष्ट रूप से की गई है और किसका कोई उल्लेख ही नहीं मिलता । जब प्रश्न किसी 'न समझी गई आवश्यकता' के बारे में पूछता है, तो उत्तर सामान्यतः वह विकल्प होता है जिसका संकेत गद्यांश में कहीं भी नहीं मिलता, जबकि शेष विकल्पों की चर्चा गद्यांश में प्रत्यक्ष रूप से की गई होती है ।
प्रयोग: दिए गए गद्यांश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पूर्वजों ने महसूस किया कि कर्म योग और ज्ञान योग सच्ची प्रगति दिलाने में सहायक नहीं होंगे; इसके बाद उन्होंने तुरंत भक्ति योग को अपनाया और इसे अपने लिए एकमात्र उपयुक्त मार्ग के रूप में अनुभव किया । इस प्रकार कर्म, ज्ञान और भक्ति — तीनों मार्गों के विषय में पूर्वजों की समझ गद्यांश में स्पष्ट रूप से वर्णित है । इसके विपरीत, 'मानसिक विकास' नाम की कोई अवधारणा गद्यांश में कहीं भी नहीं आती ।
अन्य विकल्पों से तुलना:
ज्ञान मार्ग की: गद्यांश में स्पष्ट उल्लेख है कि पूर्वजों ने महसूस किया कि ज्ञान योग सच्ची प्रगति में सहायक नहीं होगा ।
भक्ति मार्ग की: गद्यांश में स्पष्ट उल्लेख है कि पूर्वजों ने भक्ति योग को एकमात्र मार्ग के रूप में अनुभव कर अपनाया था ।
कर्म मार्ग की: गद्यांश में स्पष्ट उल्लेख है कि पूर्वजों ने महसूस किया कि कर्म योग भी सच्ची प्रगति में सहायक नहीं होगा ।
मानसिक विकास की: गद्यांश में इस अवधारणा का कोई उल्लेख ही नहीं है, इसलिए इसके विषय में पूर्वजों की समझ गद्यांश से स्थापित नहीं होती ।
अतः जिस चीज़ की आवश्यकता को पूर्वजों ने नहीं समझा, वह है मानसिक विकास — क्योंकि गद्यांश में इसका कोई उल्लेख ही नहीं मिलता, जबकि कर्म, ज्ञान और भक्ति — तीनों मार्गों की चर्चा गद्यांश में स्पष्ट रूप से की गई है । (CTET 2023, Paper 2 की आधिकारिक उत्तर कुंजी में भी यही विकल्प सही उत्तर के रूप में दर्ज है ।)