निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सही/सबसे उपयुक्त…
2023
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
भारत में पर्व, उत्सव और मेलों की सदियों पुरानी परंपरा है। इनके ज़रिए ना सिर्फ़ संस्कृति समृद्ध होती है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बहुत ताकत मिलती है । मणिपुर में 'संगाई महोत्सव' आयोजित किया गया। मणिपुर इतने प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक समृद्धि से भरा ऐसा राज्य है कि हर कोई यहाँ एक बार ज़रूर आना चाहता है । 'संगाई महोत्सव' जैसे आयोजन निवेशकों और इंडस्ट्री को भी आकर्षित करते हैं । इस बार का आयोजन पहले से और भी ज़्यादा भव्य स्वरूप में सामने आया है जो मणिपुर के लोगों की भावना और उनके जज़्बे को दिखाता है। यह महोत्सव पहले इंफाल तक ही सीमित रहता था, लेकिन इस बार पूरे राज्य में इसका आयोजन किया गया है । जब ऐसे आयोजनों को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों के साथ जोड़ा जाता है, तभी इसकी पूरी क्षमता सामने आ पाती है।
गद्यांश में किसकी क्षमता के सामने आने की बात की गई है ?
Answer: B. महोत्सव की — गद्यांश-आधारित प्रश्नों में जब वाक्य में कोई सर्वनाम (जैसे ‘यह’, ‘वह’, ‘इसकी’, ‘उसकी’) आता है, तो उसका अर्थ जानने के लिए यह देखना ज़रूरी होता है कि वह किस…
- A.
स्थानीय कलाओं की
- B.
महोत्सव की
- C.
मणिपुर की
- D.
सांस्कृतिक समृद्धि की
Attempted by 8 students.
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Correct answer: B
गद्यांश-आधारित प्रश्नों में जब वाक्य में कोई सर्वनाम (जैसे ‘यह’, ‘वह’, ‘इसकी’, ‘उसकी’) आता है, तो उसका अर्थ जानने के लिए यह देखना ज़रूरी होता है कि वह किस संज्ञा या भाव की ओर संकेत कर रहा है; सर्वनाम अपने अर्थ और वचन (एकवचन/बहुवचन) के अनुसार निकटतम उपयुक्त संदर्भ की ओर इशारा करता है। गद्यांश के अंतिम वाक्य में लिखा है — ‘जब ऐसे आयोजनों को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों के साथ जोड़ा जाता है, तभी इसकी पूरी क्षमता सामने आ पाती है।’ यहाँ सर्वनाम ‘इसकी’ एकवचन है, इसलिए यह बहुवचन शब्द ‘आयोजनों’ (जिसके लिए ‘इनकी’ आता) की जगह एकवचन भाव — अर्थात् ‘संगाई महोत्सव’ जैसे किसी एक आयोजन/महोत्सव — की ओर संकेत करता है। अतः वाक्य का भावार्थ है कि जब महोत्सव को अधिक-से-अधिक लोगों से जोड़ा जाता है, तभी महोत्सव की पूरी क्षमता सामने आती है। इस प्रकार गद्यांश में महोत्सव की क्षमता के सामने आने की बात कही गई है। ‘स्थानीय कलाएँ’ गद्यांश के आरंभिक ‘संस्कृति समृद्ध’ होने के सामान्य कथन से जुड़ा विचार है, जो पर्व-उत्सवों के दीर्घकालिक सांस्कृतिक प्रभाव की बात करता है, न कि किसी विशेष आयोजन के विस्तार की। ‘मणिपुर’ का वर्णन गद्यांश के मध्य भाग में उसकी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक समृद्धि के आधार पर एक स्वतंत्र वाक्य में किया गया है, जो राज्य के सामान्य आकर्षण की बात करता है। ‘सांस्कृतिक समृद्धि’ गद्यांश में मणिपुर के वर्णन में और उत्सवों से संस्कृति समृद्ध होने के सामान्य कथन में — दोनों ही सामान्य सांस्कृतिक कथनों के रूप में — आती है।