निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सही/सबसे उपयुक्त…

2023

निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।

कहते हैं मनुष्य ने नौ से दस हज़ार साल पहले बौद्धिक दृष्टिकोण की खोज की थी । वह भक्ति मार्ग था । मानव इतिहास के इस दौर के लोग सबसे बुद्धिमान थे । मैंने पहले ही कहा है कि आध्यात्मिक दुनिया का महत्त्व बहुत अधिक है । फिर भी सापेक्ष दुनिया पूरी तरह से महत्त्वहीन नहीं है । जब सुदूर अतीत में मनुष्यों ने महसूस किया कि कर्म योग और ज्ञान योग उन्हें सच्ची प्रगति प्राप्त करने में मदद नहीं करेंगे, तो उन्होंने तुरंत भक्ति योग को अपना लिया ।

उन्होंने अनुभव किया कि भक्ति ही उनके लिए एकमात्र मार्ग है । मनुष्य आज अपने विकसित कर्म और ज्ञान योग के कारण और भी आगे बढ़ गया है । इस प्रकार अपने पूर्वजों की तुलना में वह भक्ति के मार्ग पर चलने की आवश्यकता को अधिक तेज़ी से महसूस करेगा । यह कर्म और ज्ञान योग का उज्ज्वल पक्ष है । यानी ये दोनों योग भक्ति मार्ग को और मज़बूत करेंगे ।

विशेषण-विशेष्य का उदाहरण है :

Answer: B. उज्ज्वल पक्षअवधारणा: विशेषण-विशेष्य विशेष रूप से विशेषण की उस आश्रित (attributive) प्रयुक्ति को कहते हैं जिसमें विशेषण शब्द — गुणवाचक ('लाल फूल'), परिमाणवाचक ('बहुत…

  1. A.

    सबसे बुद्धिमान

  2. B.

    उज्ज्वल पक्ष

  3. C.

    मानव इतिहास

  4. D.

    अधिक तेज़ी

Attempted by 7 students.

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Correct answer: B

अवधारणा: विशेषण-विशेष्य विशेष रूप से विशेषण की उस आश्रित (attributive) प्रयुक्ति को कहते हैं जिसमें विशेषण शब्द — गुणवाचक ('लाल फूल'), परिमाणवाचक ('बहुत पानी') या संख्यावाचक ('तीन घर') — अपनी विशेष्य संज्ञा से ठीक पहले जुड़कर दोनों मिलकर एक ही संज्ञा-पदबंध (शब्द-युग्म) बनाते हैं। यह विशेषण की विधेय (predicative) प्रयुक्ति से भिन्न है, जहाँ विशेषण किसी संज्ञा से पहले जुड़कर स्वतंत्र पदबंध बनाने के बजाय संयोजक क्रिया (है/था/थे) का पूरक बनकर आता है (जैसे 'फूल लाल है', 'वे बुद्धिमान थे') — विधेय-प्रयोग में विशेषण किसी संज्ञा से जुड़कर स्वतंत्र पदबंध नहीं बनाता, इसलिए वह विशेषण-विशेष्य का उदाहरण नहीं माना जाता।

प्रयोग: गद्यांश की पंक्ति 'यह कर्म और ज्ञान योग का उज्ज्वल पक्ष है' में 'उज्ज्वल पक्ष' स्वयं एक स्वतंत्र संज्ञा-पदबंध है (यहाँ विषय-पूरक के रूप में प्रयुक्त), जिसमें गुणवाचक विशेषण 'उज्ज्वल' ठीक अपने बाद आने वाली संज्ञा 'पक्ष' से जुड़कर उसका गुण बताता है। विशेषण हटाने पर भी 'पक्ष' अपने-आप में पूर्ण अर्थपूर्ण संज्ञा बना रहता है — यही विशेषण-विशेष्य पदबंध की पहचान है।

तुलना: शेष तीन वाक्यांशों का गद्यांश में हुए मूल प्रयोग के आधार पर विश्लेषण:

  • 'सबसे बुद्धिमान' — मूल वाक्य 'लोग सबसे बुद्धिमान थे' में 'बुद्धिमान' क्रिया 'थे' के बाद विधेय-पूरक (predicative) के रूप में प्रयुक्त है, न कि किसी संज्ञा से पहले जुड़कर संज्ञा-पदबंध बनाते हुए; अतः यह विशेषण-विशेष्य (आश्रित/attributive) प्रयुक्ति नहीं है।

  • 'मानव इतिहास' — यहाँ 'मानव' मूलतः एक संज्ञा (मानव जाति) है, जो दूसरी संज्ञा 'इतिहास' के साथ संज्ञा-संज्ञा संबंध बनाती है, गुणवाचक/परिमाणवाचक विशेषण के रूप में नहीं।

  • 'अधिक तेज़ी' — मूल वाक्य में यह स्वतंत्र पदबंध के रूप में नहीं, बल्कि 'तेज़ी से' (एक क्रिया-विशेषण वाक्यांश, अर्थ 'जल्दी से') के भीतर उसकी मात्रा बढ़ाने वाले शब्द के रूप में प्रयुक्त हुआ है — पूरा प्रयोग 'अधिक तेज़ी से' मिलकर क्रिया 'महसूस करेगा' को विशेषित करने वाला एक क्रिया-विशेषण वाक्यांश बनाता है। मानक/परंपरागत वर्गीकरण में इसे स्वतंत्र संज्ञा-पदबंध (विशेषण-विशेष्य) के बजाय क्रिया-विशेषण वाक्यांश माना जाता है — यही वर्गीकरण आधिकारिक उत्तर कुंजी में भी परिलक्षित है — जबकि 'उज्ज्वल पक्ष' में ऐसी कोई अस्पष्टता नहीं, क्योंकि वह वाक्य में एक स्वतंत्र संज्ञा-पदबंध (विषय-पूरक) के रूप में ही प्रयुक्त होता है, किसी क्रिया-विशेषण वाक्यांश के भीतर नहीं।

निष्कर्ष: अतः दिए गए चार वाक्यांशों में से, प्रत्येक के गद्यांश-प्रयोग के अनुसार विश्लेषण करने पर, केवल 'उज्ज्वल पक्ष' ही निस्संदिग्ध रूप से विशेषण-विशेष्य (विशेषण + संज्ञा) का संज्ञा-पदबंध बनाता है। CTET अगस्त 2023, पेपर-II (हिंदी) की आधिकारिक उत्तर कुंजी में भी यही उत्तर स्वीकृत है।

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