एक पाठ्यचर्या बनाने वाली टीम वैश्विक नैतिकता पर एक नई माध्यमिक विद्यालय इकाई…
2025
एक पाठ्यचर्या बनाने वाली टीम वैश्विक नैतिकता पर एक नई माध्यमिक विद्यालय इकाई तैयार कर रही है। उनका लक्ष्य स्पष्ट अधिगम उद्देश्यों को परिभाषित करना, मापनीय परिणाम विकसित करना और चरणबद्ध तरीके से विशिष्ट नैतिक तर्क कौशल विकसित करने वाली गतिविधियों की संरचना करना है। कौन-सा पाठ्यचर्या उपागम मुख्य रूप से इस टीम के डिज़ाइन दर्शन (design philosophy) की संदर्शिका है?
Answer: A. व्यवहारात्मक-तर्कसंगत (Behavioural-rational) — संकल्पना: पाठ्यचर्या अध्ययन में ‘उपागम’ उन आधारभूत मान्यताओं का समुच्चय है जो यह निर्धारित करती हैं कि पाठ्यचर्या का नियोजन, क्रियान्वयन और मूल्यांकन किस…
- A.
व्यवहारात्मक-तर्कसंगत (Behavioural-rational)
- B.
बौद्धिक-शैक्षणिक (Intellectual-academic)
- C.
प्रबंधकीय-प्रणालियाँ (Managerial-systems)
- D.
पुनर्संकल्पनावादी (Reconceptualist)
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Correct answer: A
संकल्पना: पाठ्यचर्या अध्ययन में ‘उपागम’ उन आधारभूत मान्यताओं का समुच्चय है जो यह निर्धारित करती हैं कि पाठ्यचर्या का नियोजन, क्रियान्वयन और मूल्यांकन किस प्रकार किया जाना चाहिए। व्यवहारात्मक-तर्कसंगत उपागम (Behavioural-rational approach)—जो सबसे पुराना और आज भी सर्वाधिक प्रयुक्त उपागम है—पाठ्यचर्या को एक रूपरेखा के रूप में देखता है: निर्धारित लक्ष्यों को सटीक, प्रेक्षणीय और मापनीय उद्देश्यों में विभाजित किया जाता है; तत्पश्चात उन साध्यों की प्राप्ति के साधनों के रूप में विषयवस्तु और अधिगम-गतिविधियों को क्रमबद्ध किया जाता है; और शिक्षार्थियों की उपलब्धि का मूल्यांकन कथित उद्देश्यों के आधार पर किया जाता है। यह एक तार्किक, निर्देशात्मक और साधन-साध्य प्रतिमान है, जिसकी परंपरा बॉबिट और चार्टर्स से आरंभ होकर टायलर और टाबा तक जाती है।
इस इकाई पर अनुप्रयोग: दल द्वारा बताए गए तीनों चरण इस प्रतिमान से एक-के-बदले-एक के अनुरूप हैं।
‘स्पष्ट अधिगम-उद्देश्यों को निर्धारित करना’ किसी भी विषयवस्तु के चयन से पहले साध्यों को स्थापित करता है—यह रूपरेखा का निर्धारित-लक्ष्य वाला चरण है।
‘मापनीय अधिगम-परिणाम विकसित करना’ उन साध्यों को उपलब्धि के प्रेक्षणीय मानदंडों में परिवर्तित करता है; यही वह व्यवहारात्मक मानदंड है जिससे इस उपागम को अपना नाम मिलता है।
‘विशिष्ट नैतिक तर्कणा-कौशलों का चरणबद्ध विकास करने वाली गतिविधियों को संरचित करना’ पहले से निर्धारित साध्यों की प्राप्ति के साधनों के रूप में गतिविधियों का चयन और क्रम-निर्धारण करता है—यह तर्कसंगत प्रतिमान के साधन-साध्य तर्क के ठीक अनुरूप है।
दिए गए अन्य उपागमों से मिलान:
बौद्धिक-शैक्षणिक उपागम (Intellectual-academic approach): यह किसी विशिष्ट शिक्षण-इकाई के लिए मापनीय उद्देश्य निर्धारित करने के बजाय पाठ्यचर्या का अध्ययन एक शैक्षिक अनुशासन के रूप में—उसकी ऐतिहासिक, दार्शनिक और सामाजिक आधारभूमियों तथा व्यापक संकल्पनात्मक प्रतिमानों सहित—करता है।
प्रबंधकीय-प्रणालियाँ उपागम (Managerial-systems approach): यह विद्यालय को एक संगठन और सामाजिक प्रणाली के रूप में देखता है तथा पर्यवेक्षण, पाठ्यचर्या समितियों, कार्मिक-व्यवस्था, समय-सारणी और कार्यक्रमगत परिवर्तन के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करता है।
पुनर्संकल्पनावादी उपागम (Reconceptualist approach): यह पाठ्यचर्या को विचारधारा, सत्ता, संस्कृति और व्यक्ति के जीवित अनुभव के माध्यम से आलोचनात्मक ढंग से समझता है तथा तकनीकी साधन-साध्य नियोजन-तर्क को लागू करने के बजाय उसी पर प्रश्न उठाता है।
चूँकि वर्णित अभिकल्प-दर्शन आरंभ से अंत तक पूर्वनिर्धारित, मापनीय उद्देश्यों और क्रमबद्ध साधनों से संचालित है, इसलिए इस दल का मार्गदर्शन करने वाला उपागम व्यवहारात्मक-तर्कसंगत उपागम (Behavioural-rational approach) है।