भाषा, भाषा अधिगम की प्रकृति और शिक्षण-शास्त्रीय व्यवस्थाओं में दोनों की…
2023
भाषा, भाषा अधिगम की प्रकृति और शिक्षण-शास्त्रीय व्यवस्थाओं में दोनों की अनुप्रयोगिता के बारे में सैद्धान्तिक स्थितियों एवं मतों को क्या कह सकते हैं ?
- A.
युक्ति (टेकनीक)
- B.
पाठ्यक्रम
- C.
विषय-वस्तु
- D.
उपागम
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Correct answer: D
अवधारणा
भाषा-शिक्षण पद्धति-विज्ञान में एडवर्ड एंथनी (1963) के प्रसिद्ध त्रि-स्तरीय मॉडल के अनुसार शिक्षण की तीन परस्पर-सम्बद्ध अवधारणाएँ हैं — उपागम (Approach), विधि (Method) और युक्ति (Technique)। इनमें उपागम सबसे ऊपर के स्तर पर होता है: यह भाषा की प्रकृति एवं भाषा-अधिगम की प्रक्रिया से संबंधित सैद्धान्तिक मान्यताओं और विश्वासों का समुच्चय है, जिस पर आगे की समस्त शिक्षण-शास्त्रीय व्यवस्थाएँ (विधियाँ व युक्तियाँ) आधारित होती हैं।
प्रयोग
प्रश्न में वर्णित विशेषताएँ — 'भाषा, भाषा-अधिगम की प्रकृति' के विषय में 'सैद्धान्तिक स्थितियाँ एवं मत' तथा 'शिक्षण-शास्त्रीय व्यवस्थाओं में अनुप्रयोगिता' — ठीक उपागम की उपर्युक्त परिभाषा से मेल खाती हैं। अतः दिए गए विकल्पों में सही उत्तर 'उपागम' है।
तुलना
युक्ति — कक्षा-स्तर पर किसी सुनिश्चित तात्कालिक उद्देश्य की पूर्ति हेतु प्रयुक्त एक ठोस, विशिष्ट क्रियाकलाप है; यह किसी सैद्धान्तिक मान्यता-तंत्र को नहीं दर्शाती।
पाठ्यक्रम — शिक्षण उद्देश्यों, विषयों और अधिगम-अनुभवों की सुव्यवस्थित योजना को दर्शाता है, अर्थात् 'क्या पढ़ाया जाए' का संगठित ढांचा।
विषय-वस्तु — वह वास्तविक ज्ञान-सामग्री है जिसे पाठ्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता है।
निष्कर्ष
इस प्रकार भाषा एवं भाषा-अधिगम की प्रकृति संबंधी सैद्धान्तिक मान्यताओं और मतों को 'उपागम' (Approach) कहा जाता है, जो विधि और युक्ति दोनों का सैद्धान्तिक आधार प्रदान करता है।