शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में, आकलन की प्राथमिक भूमिका क्या है?

2025

शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में, आकलन की प्राथमिक भूमिका क्या है?

  1. A.

    शिक्षार्थियों की तुलना करना

  2. B.

    निर्देशन को सरल बनाना

  3. C.

    बुद्धिमत्ता के अनुसार रैंकिंग करना

  4. D.

    उपलब्धि प्रमाणित करना

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Correct answer: B

अवधारणा: शिक्षा-मनोविज्ञान एवं नीति दस्तावेज़ों (NCF 2005, NEP 2020 धारा 4.34, NCFSE 2023 धारा 3.4.1-3.4.2) के अनुसार, शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में आकलन के कई कार्य हो सकते हैं, परंतु इसकी प्राथमिक एवं शैक्षिक दृष्टि से सर्वाधिक मूल्यवान भूमिका निदानात्मक एवं रचनात्मक (formative) है। आकलन से प्राप्त फीडबैक शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को निरंतर निर्देशित एवं सुधारने के लिए प्रयोग होती है, ताकि शिक्षक अपनी शिक्षण-विधि को समायोजित कर सकें और शिक्षार्थी अपनी प्रगति को समझ सकें। शिक्षार्थियों की तुलना करना, बुद्धिमत्ता के आधार पर रैंकिंग करना, तथा उपलब्धि को प्रमाणित करना -- ये सभी द्वितीयक/प्रशासनिक उपयोग हैं जो शिक्षण-अधिगम के बाद आते हैं, न कि वे कार्य जो इसे संचालित करते हैं।

अनुप्रयोग: उपरोक्त सिद्धांत के आधार पर चारों विकल्पों का परीक्षण करने पर, "निर्देशन को सरल बनाना" सीधे उस निर्देशनात्मक/मार्गदर्शक भूमिका से मेल खाता है, जिसका उल्लेख NEP 2020 (धारा 4.34) तथा NCFSE 2023 (धारा 3.4.1-3.4.2) में किया गया है -- दोनों दस्तावेज़ बताते हैं कि कक्षा-आकलन का मुख्य उद्देश्य शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को निरंतर निर्देशित एवं संशोधित करने हेतु इनपुट प्रदान करना है।

  • शिक्षार्थियों की तुलना करना -- तुलना, स्कोर के मानक-संदर्भित (norm-referenced) एवं संकलनात्मक (summative) उपयोग को दर्शाती है; यह शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के भीतर आकलन की भूमिका का वर्णन नहीं करती।

  • बुद्धिमत्ता के अनुसार रैंकिंग करना -- बुद्धिमत्ता के आधार पर रैंकिंग करना आकलन को योग्यता के मनोमितीय (psychometric) मापन से जोड़ता है; यह कक्षा में शिक्षण-अधिगम हेतु आकलन का कार्य नहीं।

  • उपलब्धि प्रमाणित करना -- प्रमाणन (जैसे अंक/ग्रेड/प्रमाणपत्र जारी करना) चरण के अंत में किया जाने वाला प्रशासनिक उपयोग है, जो केवल प्रमुख पड़ावों पर लागू होता है, शिक्षण-अधिगम के दौरान इसकी सतत प्राथमिक भूमिका नहीं।

परिणाम: शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में आकलन की प्राथमिक भूमिका उस प्रक्रिया को निर्देशित/सुगम बनाना है -- अर्थात् "निर्देशन को सरल बनाना"।

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