निम्नलिखित में से किसे भारत के पूर्व-पुरापाषाण युग का औज़ार नहीं माना जाता है?

2025

निम्नलिखित में से किसे भारत के पूर्व-पुरापाषाण युग का औज़ार नहीं माना जाता है?

  1. A.

    चॉपर (Chopper)

  2. B.

    अर्धचंद्राकार (Lunate)

  3. C.

    नुकीला हस्तकुठार (Handaxe)

  4. D.

    विदारणी (Cleaver)

Attempted by 6 students.

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Correct answer: B

अवधारणा: भारत के पाषाण युग को उपकरण-प्रौद्योगिकी के आधार पर मुख्यतः पुरापाषाण युग (निम्न, मध्य, उच्च चरण), उसके बाद मध्यपाषाण युग और फिर नवपाषाण युग में बाँटा जाता है। निम्न पुरापाषाण चरण (एश्यूलियन/सोहन परंपरा) की पहचान बड़े, भारी 'कोर उपकरणों' से होती है — जैसे हस्तकुठार, विदारणी और चॉपर — जिन्हें किसी पत्थर के कोर/पेबल से हथौड़ा-पत्थर द्वारा सीधे प्रहार से कुछ फ्लेक हटाकर बनाया जाता था। इसके विपरीत, बाद के मध्यपाषाण युग की पहचान छोटे, बारीकी से रिटच किए गए ज्यामितीय 'माइक्रोलिथ' (लघु उपकरण) — जैसे अर्धचंद्राकार (लूनेट), ट्रैपेज़ और त्रिभुज — से होती है, जिन्हें प्रायः जोड़कर मिश्रित (composite) उपकरण बनाए जाते थे।

अनुप्रयोग: दिए गए चार उपकरणों में से नुकीला हस्तकुठार, विदारणी और चॉपर — तीनों बड़े कोर उपकरण हैं जो सीधे प्रहार (direct percussion) की तकनीक से बनाए जाते थे, और तीनों भारत के निम्न पुरापाषाणकालीन (एश्यूलियन/सोहन) उपकरण-समूहों के सुपरिचित प्रकार-उपकरण (type-tools) हैं, जो सोहन घाटी तथा प्रायद्वीपीय भारत के अनेक स्थलों से मिलते हैं। इसके विपरीत, अर्धचंद्राकार (लूनेट) एक छोटा, अर्धचंद्र के आकार का ज्यामितीय माइक्रोलिथ है — जो मध्यपाषाण युग की पहचान वाला उपकरण है (जैसे बागोर, लांघणज जैसे स्थलों पर मिलता है) — और यह निम्न पुरापाषाण उपकरण-समूह का भाग नहीं है।

  • चॉपर (Chopper) — पेबल/कोर से बना भारी, एकफलकीय कोर-उपकरण, सीधे प्रहार से गढ़ा जाता है — निम्न पुरापाषाण की तकनीक से मेल खाता है।

  • नुकीला हस्तकुठार (Handaxe) — द्विफलकीय ढंग से तराशा गया, एश्यूलियन उद्योग का प्रमुख निम्न पुरापाषाणकालीन प्रकार-उपकरण।

  • विदारणी (Cleaver) — चौड़े, सीधे अनुप्रस्थ किनारे वाला द्विफलकीय कोर-उपकरण, यह भी निम्न पुरापाषाण का एक क्लासिक उपकरण है।

  • अर्धचंद्राकार (Lunate) — ब्लेड/फ्लेक पर बारीक रिटच से बना छोटा ज्यामितीय माइक्रोलिथ — यह मध्यपाषाण युग की तकनीक व वर्गीकरण से मेल खाता है, निम्न पुरापाषाण से नहीं।

क्रॉस-चेक: यह विनिर्माण-तकनीक से भी पुष्ट होता है — हस्तकुठार, विदारणी और चॉपर तीनों बड़े कोर/पेबल पर सीधे प्रहार से बनाए जाते हैं (निम्न पुरापाषाण की पहचान वाली विधि), जबकि अर्धचंद्राकार एक छोटे ब्लेड/फ्लेक पर बारीक दबाव-रिटच (pressure-retouch) से अपना घुमावदार ज्यामितीय आकार पाता है — यह मध्यपाषाणकालीन माइक्रोलिथिक तकनीक की पहचान है। चूँकि अर्धचंद्राकार की तकनीक और वर्गीकरण दोनों निम्न पुरापाषाण के बजाय मध्यपाषाण युग से मेल खाते हैं, इसलिए 'अर्धचंद्राकार (Lunate)' ही वह उपकरण है जिसे भारत के निम्न पुरापाषाण युग का उपकरण नहीं माना जाता — यही सही उत्तर है।

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