भारत के भूकंपीय क्षेत्र मानचित्र के अनुसार, देश के कुल क्षेत्रफल को कितने…
2025
भारत के भूकंपीय क्षेत्र मानचित्र के अनुसार, देश के कुल क्षेत्रफल को कितने भूकंपीय क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है?
- A.
5
- B.
3
- C.
4
- D.
6
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Correct answer: C
अवधारणा: किसी क्षेत्र में भूकंप से होने वाली संभावित क्षति के आकलन के लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) द्वारा मानक IS 1893 के अंतर्गत भूकंपीय क्षेत्रीकरण मानचित्र तैयार किया जाता है। यह वर्गीकरण किसी क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना, ऐतिहासिक भूकंपीय गतिविधि और अपेक्षित अधिकतम भूकंपीय तीव्रता (Peak Ground Acceleration) के आधार पर किया जाता है — क्षेत्र की संख्या जितनी अधिक (यानी रोमन अंक जितना बड़ा), भूकंपीय जोखिम उतना ही अधिक माना जाता है।
वर्ष 2002 में संशोधित IS 1893 मानक के अनुसार, पूर्व में प्रचलित पाँच-क्षेत्रीय वर्गीकरण (क्षेत्र I से V) में संशोधन करते हुए क्षेत्र I को क्षेत्र II में मिला दिया गया।
इस संशोधन के बाद वर्तमान मानचित्र में भारत के कुल क्षेत्रफल को चार भूकंपीय क्षेत्रों — क्षेत्र II, क्षेत्र III, क्षेत्र IV और क्षेत्र V — में वर्गीकृत किया गया है।
इस प्रकार दिए गए विकल्पों में से भारत के भूकंपीय क्षेत्रों की कुल संख्या 'चार (4)' सही उत्तर है।
क्षेत्र | जोखिम श्रेणी | उदाहरण क्षेत्र |
|---|---|---|
क्षेत्र II | निम्न क्षति जोखिम | मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ भाग |
क्षेत्र III | मध्यम क्षति जोखिम | मुंबई और चेन्नई |
क्षेत्र IV | उच्च क्षति जोखिम | दिल्ली-एनसीआर |
क्षेत्र V | अति उच्च क्षति जोखिम | कश्मीर घाटी और पूर्वोत्तर राज्य |
जाँच: BIS तथा भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के प्रकाशनों में भी स्वतंत्र रूप से पुष्टि होती है कि वर्तमान में भारत चार भूकंपीय क्षेत्रों में विभाजित है; पुराना पाँच-क्षेत्रीय वर्गीकरण (सन् 2002 से पहले प्रचलित) अब उपयोग में नहीं है, इसलिए विकल्प '5' सही उत्तर नहीं है।
अतः सही उत्तर है: चार (4) भूकंपीय क्षेत्र।