गद्यांशइस संसार में धन ही सब कुछ नहीं है। धन की पूजा तो बहुत कम जगहों में होती…

2024

गद्यांश

इस संसार में धन ही सब कुछ नहीं है। धन की पूजा तो बहुत कम जगहों में होती देखी गई है। संसार का इतिहास उठाकर देखिए और उदाहरण ढूँढ़-ढूँढ़कर सामने रखिए, तो हमें पता चल जायगा कि जिनकी हम उपासना करते हैं, जिनके लिए हम आँखें बिछाए रहते हैं, जिनके स्मारक बनाते हैं, उन लोगों ने कभी भी रुपया कमाने में अपना समय नहीं बिताया। उनके द्वारा किए गए कार्यों का मूल्य रुपये के मूल्य से अधिक है। जिन लोगों के जीवन का उद्देश्य सिर्फ रुपये बटोरना है, उनकी प्रतिष्ठा कम हुई है। लोगों ने उनकी अनदेखी की है। मानव समाज स्वार्थी अवश्य है, पर वह स्वार्थ की उपासना करना नहीं जानता।

परमार्थी व्यक्तियों के द्वारा किए गए कार्यों का मूल्य किसके मूल्य से अधिक है?

  1. A.

    समय के मूल्य से

  2. B.

    रूपये के मूल्य से

  3. C.

    कागज के मूल्य से

  4. D.

    उपर्युक्त में से एक से अधिक

  5. E.

    उपर्युक्त में से कोई नहीं

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Correct answer: B

गद्यांश में कहा गया है कि परमार्थी व्यक्तियों के कार्यों का मूल्य रुपये के मूल्य से अधिक है।

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