महादेवी वर्मा की पीड़ा मीराबाई की ऐकांतिक पीड़ा नहीं है, बल्कि उनकी पीड़ा…
2024
महादेवी वर्मा की पीड़ा मीराबाई की ऐकांतिक पीड़ा नहीं है, बल्कि उनकी पीड़ा शताब्दियों से समाज के निर्मम प्रतिबंधों में जकड़ी हुई नारी जाति की पीड़ा है। महादेवी का साहित्य रचनात्मक करुणा के भाव से भरा हुआ है। उनके व्यावहारिक जीवन की रचनात्मक करुणा से उनके काव्य को अलग नहीं किया जा सकता है। उनकी वेदना को उस करुणा के साथ जोड़ना होगा जो नारियों की परवशता, शोषितों की विवशता और दलितों की असहायावस्था पर फूट पड़ती है। महादेवी की पीड़ा व्यक्ति की संकीर्ण सीमा से निकलकर समाज कि विस्तृत सीमा पर छाई हुई है। महादेवी वर्मा की विशेषता यह है की छायावाद ने व्यक्ति और समाज की जिस व्यापक असंतोष भावना को अभिव्यक्ति दी उसमें उन्होंने भारतीय नारी के असंतोष, निराशा और आकांक्षा का स्वर भी जोड़ दिया।
महादेवी वर्मा का साहित्य कैसा है?
Answer: A. रचनात्मक करुणा के भाव से भरपूर — गद्यांश में कहा गया है कि महादेवी वर्मा का साहित्य रचनात्मक करुणा के भाव से भरा हुआ है। इसलिए सही उत्तर यही है।
- A.
रचनात्मक करुणा के भाव से भरपूर
- B.
श्रृंगार वर्णन से भरपूर
- C.
समाज के प्रति अनुदार
- D.
उपर्युक्त में से एक से अधिक
- E.
उपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: A
गद्यांश में कहा गया है कि महादेवी वर्मा का साहित्य रचनात्मक करुणा के भाव से भरा हुआ है। इसलिए सही उत्तर यही है।