गद्यांश: प्रगति के पथ पर मानव बहुत दूर चला आया है। जीवन के हर क्षेत्र में कई…
2021
गद्यांश:
प्रगति के पथ पर मानव बहुत दूर चला आया है। जीवन के हर क्षेत्र में कई ऐसे मुकाम प्राप्त हो गये हैं जो हमें जीवन की सभी सुविधाएँ, सभी आराम प्रदान करते हैं। आज संसार मानव की मुट्ठी में समाया हुआ है। जीवन के क्षेत्रों में सबसे अधिक क्रांतिकारी कदम संचार क्षेत्र में उठाए गए हैं। अनेक नए स्रोत, नए साधन और नई सुविधाएँ प्राप्त कर ली गई हैं जो हमें आधुनिकता के दौर में काफी ऊपर ले जाकर खड़ा करता है। इसकी शुरुआत 1969 में एडवान्स्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेसिज द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका के चार विश्वविद्यालयों के कंप्यूटरों की नेटवर्किंग करके की गई थी। इसका विकास मुख्य रूप से शिक्षा, शोध एवं सरकारी संस्थाओं के लिए किया गया था। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य था संचार माध्यमों को वैसी आपात स्थिति में भी बनाए रखना जब सारे माध्यम निष्फल हो जाएँ। 1971 तक इस कम्पनी ने लगभग दो दर्जन कंप्यूटरों को इस नेट से जोड़ दिया था। 1972 में शुरुआत हुई ई-मेल की जिसने संचार जगत में क्रांति ला दी। 1996 तक इंटरनेट की लोकप्रियता काफी बढ़ गयी थी। मोन्ट्रीयल के पीटर ड्यूस ने पहली बार 1989 में मैक-गिल यूनिवर्सिटी में इंटरनेट इंडेक्स बनाने का प्रयोग किया। वर्ष 2000 में इंटरनेट इतनी बढ़ गई कि इसमें वायरस जैसी कई तरह की समस्याएँ भी आने लगीं। भारत भी अपनी भागीदारी इन उपलब्धियों में जोड़ता रहा। आज भारत में इंटरनेट कनेक्शनों और प्रयोगकर्ताओं की संख्या लाखों में है। ऐसे ही संचार साधनों में आज एक बड़ा ही सहज नाम इंटरनेट है।
आज संसार किसकी मुट्ठी में समाया हुआ हैं?
Answer: A. मानव — गद्यांश की पहली पंक्ति में कहा गया है कि प्रगति के पथ पर मानव बहुत दूर चला आया है।
- A.
मानव
- B.
कंपनी
- C.
शोध
- D.
सुविधाएँ
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Correct answer: A
गद्यांश की पहली पंक्ति में कहा गया है कि प्रगति के पथ पर मानव बहुत दूर चला आया है।