निर्देश: दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के उत्तर…
2021
निर्देश: दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
गद्यांश: हरित क्रांति ने स्वतंत्रता के बाद ज़मींदारी उन्मूलन, भूमि सुधार जैसे कदमों के चलते भारत में समतामूलक समाज के निर्माण को गति प्रदान की। इससे छोटे व मध्यम स्तर के किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ और इससे उनमें शिक्षा तथा राजनैतिक चेतना का विकास हुआ। हरित क्रांति के अंतर्गत आधुनिक तकनीक और खादों का अधिकाधिक प्रयोग करके भूमि पर अधिक से अधिक फसलें उगाने का प्रयास किया गया। इसके लिए जब बड़ी मात्रा में रासायनिक खादों का प्रयोग किया गया तो भूमि की उर्वरक क्षमता कम हो गयी। सिंचाई के अधिक प्रयोग के कारण भूमि में नमक की मात्रा भी बढ़ गयी। हरित क्रांति देश के कतिपय हिस्सों जैसे-पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश आदि में ही केन्द्रित थी। अतः इन क्षेत्रों का तेज़ी से विकास हुआ लेकिन देश के अन्य क्षेत्र हरित क्रांति से वंचित रह गये। हमें हरित क्रांति की प्रेरणा तब मिली थी, जब साठ के दशक के मध्य में अच्छी फसल नहीं हुई थी और अकाल के हालात पैदा हो गए थे, लेकिन इसका असली उद्देश्य था, भारत में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना और अगर सटीक रूप में कहा जाए तो इसका मुख्य उद्देश्य भारत को खाद्यान्न के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना था। हरित क्रांति में मुख्यतः गेहूँ के उत्पादन पर विशेष जोर दिया गया था। आज भारत खाद्यान्न के उत्पादन के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर आत्मनिर्भर हो गया है व साथ ही गेहूँ और चावल के मामले में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और चावल का सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है।
प्रश्न: भारत में इस क्रांति का मुख्य उद्देश्य क्या था?
- A.
रासायनिक खादों का प्रयोग
- B.
भूमि की उर्वरक क्षमता कम करना
- C.
आधुनिक तकनीक का प्रयोग
- D.
खाद्यान्न के उत्पादन में आत्मनिर्भरता
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Correct answer: D
अवधारणा: गद्यांश-आधारित प्रश्नों में जब किसी घटना/नीति का 'मुख्य उद्देश्य' पूछा जाए, तो उत्तर वही होगा जो पाठ में स्पष्ट रूप से उद्देश्य/लक्ष्य के रूप में कहा गया हो — न कि वह विधि/साधन जिसके ज़रिए इसे हासिल किया गया, और न ही कोई आकस्मिक परिणाम या दुष्प्रभाव जिसका उल्लेख साथ में हुआ हो।
अनुप्रयोग: गद्यांश में स्पष्ट रूप से लिखा है — "...इसका असली उद्देश्य था, भारत में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना और अगर सटीक रूप में कहा जाए तो इसका मुख्य उद्देश्य भारत को खाद्यान्न के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना था।" यह वाक्य सीधे तौर पर क्रांति के उद्देश्य को नामित करता है, जो विकल्प 'खाद्यान्न के उत्पादन में आत्मनिर्भरता' से पूर्णतः मेल खाता है।
तुलना/विरोधाभास: गद्यांश में वर्णित शेष तत्वों को उद्देश्य से अलग पहचानना ज़रूरी है:
रासायनिक खादों का प्रयोग तथा आधुनिक तकनीक का प्रयोग — ये दोनों उत्पादन बढ़ाने के लिए अपनाए गए साधन/विधियाँ थीं, गद्यांश में इन्हें उद्देश्य नहीं बल्कि तरीके के रूप में बताया गया है।
भूमि की उर्वरक क्षमता कम होना — यह अत्यधिक रासायनिक खादों व सिंचाई के प्रयोग से उत्पन्न एक दुष्प्रभाव है, जिसे गद्यांश स्वयं एक समस्या/परिणाम के रूप में प्रस्तुत करता है, लक्ष्य के रूप में नहीं।
निष्कर्ष: अतः भारत में हरित क्रांति का मुख्य उद्देश्य खाद्यान्न के उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना था।