भारतीय संविधान के 7वें मौलिक अधिकार को किस संवैधानिक संशोधन के माध्यम से भाग…
2024
भारतीय संविधान के 7वें मौलिक अधिकार को किस संवैधानिक संशोधन के माध्यम से भाग III से निरस्त कर दिया गया था?
Answer: A. 44वाँ संशोधन, 1978 — अवधारणामौलिक अधिकार संविधान के भाग III में दिए गए न्यायालय-प्रवर्तनीय अधिकार हैं। मूल संविधान में संपत्ति से संबंधित संरक्षण अनुच्छेद 19(1)(f) और अनुच्छेद 31…
- A.
44वाँ संशोधन, 1978
- B.
42वाँ संशोधन, 1976
- C.
44वाँ संशोधन, 1976
- D.
42वाँ संशोधन, 1978
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Correct answer: A
अवधारणा
मौलिक अधिकार संविधान के भाग III में दिए गए न्यायालय-प्रवर्तनीय अधिकार हैं। मूल संविधान में संपत्ति से संबंधित संरक्षण अनुच्छेद 19(1)(f) और अनुच्छेद 31 में था।
संविधान संशोधन किसी अधिकार को भाग III से हटाकर दूसरी संवैधानिक श्रेणी में रख सकता है। संपत्ति का अधिकार हटने के बाद अनुच्छेद 300A के अंतर्गत संवैधानिक कानूनी अधिकार के रूप में बना रहा।
प्रयोग
संविधान (चवालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 5 ने भाग III से ‘संपत्ति का अधिकार’ उपशीर्षक हटाया और धारा 6 ने अनुच्छेद 31 को लोप किया। उसी अधिनियम की धारा 34 ने भाग XII में अनुच्छेद 300A जोड़ा। इसलिए प्रश्न में वर्णित परिवर्तन 44वें संशोधन, 1978 से हुआ।
तुलना
42वाँ संशोधन, 1976 व्यापक संवैधानिक परिवर्तनों, प्रस्तावना में शब्दों के समावेश और मौलिक कर्तव्यों से संबंधित था; उसने संपत्ति के अधिकार को भाग III से नहीं हटाया।
‘44वाँ संशोधन, 1976’ नाम-वर्ष संयोजन वैधानिक अभिलेख से मेल नहीं खाता, क्योंकि चवालीसवें संशोधन अधिनियम का वर्ष 1978 है।
‘42वाँ संशोधन, 1978’ नाम-वर्ष संयोजन भी वैधानिक अभिलेख से मेल नहीं खाता, क्योंकि बयालीसवें संशोधन अधिनियम का वर्ष 1976 है।
निष्कर्ष
सही मूल्य है: 44वाँ संशोधन, 1978।