भारतीय शास्त्रीय नृत्य में त्रिभंग (Tribhanga) क्या है?
2025
भारतीय शास्त्रीय नृत्य में त्रिभंग (Tribhanga) क्या है?
Answer: B. शारीरिक मुद्रा में तीन मोड़ — संकल्पना: भारतीय शास्त्रीय नृत्य और मंदिर-मूर्तिकला की साझा देह-व्याकरण में किसी खड़ी मुद्रा का वर्णन इस आधार पर किया जाता है कि शरीर का ऊर्ध्वाधर अक्ष सीधी…
- A.
कथक की तीन अभिनय मुद्राएँ
- B.
शारीरिक मुद्रा में तीन मोड़
- C.
कथकली की तीन अलग-अलग शैलियाँ
- D.
कथक के तीन अलग-अलग रूप
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Correct answer: B
संकल्पना: भारतीय शास्त्रीय नृत्य और मंदिर-मूर्तिकला की साझा देह-व्याकरण में किसी खड़ी मुद्रा का वर्णन इस आधार पर किया जाता है कि शरीर का ऊर्ध्वाधर अक्ष सीधी रेखा से कितनी बार विचलित होता है। ऐसे प्रत्येक विचलन को भंग कहा जाता है और इन विचलनों की संख्या के आधार पर मुद्राओं के नाम रखे जाते हैं: समभंग (अक्ष सीधा), अभंग (एक हल्का विचलन), द्विभंग (दो) और त्रिभंग (तीन)।
इस पद पर नियम का प्रयोग: उपसर्ग ‘त्रि-’ संख्या को तीन निर्धारित करता है; अतः त्रिभंग वह खड़ी मुद्रा है जिसमें शरीर तीन स्थानों पर मुड़ा होता है—गर्दन पर, जहाँ सिर एक ओर झुका होता है; कमर पर धड़, जो विपरीत दिशा में खिसका होता है; और कूल्हे/घुटने पर, जहाँ शरीर का भार एक पैर पर डाला जाता है। चूँकि ये तीनों विचलन बारी-बारी से विपरीत दिशाओं में झुकते हैं, इसलिए वे मिलकर आकृति का विशिष्ट एस-वक्र बनाते हैं।
इस मुद्रा का प्रयोग: त्रिभंग ओडिसी की दो आधारभूत मुद्राओं में से एक है; दूसरी मुद्रा चौक है। यह बांसुरी बजाते कृष्ण की मानक मूर्तिकला-मुद्रा भी है, इसलिए यही शब्द नर्तकों और कला-इतिहासकारों, दोनों के लिए समान रूप से प्रयुक्त होता है।
अभिव्यंजक शब्दावली से भेद: अभिनय नृत्य का संप्रेषणात्मक आयाम है—जिसमें संकेत, मुखाभिव्यक्ति, वेशभूषा और आंतरिक भाव के माध्यम से अर्थ व्यक्त किया जाता है—और इसे संख्या के आधार पर निर्धारित मुद्राओं में नहीं, बल्कि शास्त्रीय रूप से चार प्रकारों (आंगिक, वाचिक, आहार्य और सात्विक) में वर्गीकृत किया जाता है।
शैलीगत शब्दावली से भेद: किसी नृत्य-रूप के विभागों के नामकरण की पद्धति भी भिन्न होती है—कथकली के विभाग संप्रदाय (वेट्टत्तु, कल्लडिक्कोडन, कप्लिंगाडन, कल्लुवाझी) और कथक के विभाग घराने (लखनऊ, जयपुर, बनारस) कहलाते हैं—अतः शैलियों या रूपों की संख्या पूर्णतः अलग वर्गीकरण से संबंधित है।
अतः त्रिभंग शरीर के तीन मोड़ों से निर्धारित मुद्रा को दर्शाता है।