दिए गए कथनों और निष्कर्षों को ध्यानपूर्वक पढ़िए। यह मानते हुए कि कथनों में दी…

2025

दिए गए कथनों और निष्कर्षों को ध्यानपूर्वक पढ़िए। यह मानते हुए कि कथनों में दी गई जानकारी सत्य है, भले ही वह सामान्यतः ज्ञात तथ्यों से भिन्न प्रतीत होती हो, तय कीजिए कि दिए गए निष्कर्षों में से कौन-से निष्कर्ष, कथनों का तार्किक रूप से अनुसरण करते हैं। कथन: सभी चप्पल, कौवे हैं। सभी चप्पल, ढोल हैं। कुछ ढोल, पिन हैं। निष्कर्ष: (I) कुछ पिन, चप्पल हैं। (II) कुछ ढोल, कौवे हैं।

Answer: D. केवल निष्कर्ष (II) अनुसरण करता है।अवधारणाकोई निष्कर्ष तभी अनुसरण करता है, जब वह उन सभी आरेखों में सत्य हो जो सभी कथनों को संतुष्ट करते हैं; उसे अस्वीकार करने के लिए केवल एक सुसंगत…

  1. A.

    न तो निष्कर्ष (I) और न ही (II) अनुसरण करता है।

  2. B.

    निष्कर्ष (I) और (II) दोनों अनुसरण करते हैं।

  3. C.

    केवल निष्कर्ष (I) अनुसरण करता है।

  4. D.

    केवल निष्कर्ष (II) अनुसरण करता है।

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Correct answer: D

अवधारणा

कोई निष्कर्ष तभी अनुसरण करता है, जब वह उन सभी आरेखों में सत्य हो जो सभी कथनों को संतुष्ट करते हैं; उसे अस्वीकार करने के लिए केवल एक सुसंगत प्रति-व्यवस्था पर्याप्त है। एक ही कर्ता-वर्ग वाले दो सार्वभौमिक स्वीकारात्मक कथन—सभी A, B हैं और सभी A, C हैं—विशेष संबंध ‘कुछ B, C हैं’ को अनिवार्य बनाते हैं, क्योंकि रिक्त न होने वाला वर्ग A एक ही समय में B और C दोनों के भीतर स्थित होता है। विशेष कथन ‘कुछ X, Y हैं’ को ‘सभी Z, X हैं’ के साथ लेने पर Y और Z के बीच कोई संबंध अनिवार्य नहीं होता, क्योंकि X के जिस भाग में Y हैं, उसमें किसी Z का होना आवश्यक नहीं है।

इन कथनों पर अनुप्रयोग

  1. ‘सभी चप्पल कौवे हैं’ पूरे चप्पल-वर्ग को कौवा-वर्ग के भीतर रखता है।

  2. ‘सभी चप्पल ढोल हैं’ उसी चप्पल-वर्ग को ढोल-वर्ग के भीतर रखता है।

  3. दोनों सार्वभौमिक कथनों का कर्ता-वर्ग चप्पल समान है, जो रिक्त नहीं है; अतः प्रत्येक चप्पल एक ही समय में ढोल और कौवा है। इसलिए ढोल-वर्ग और कौवा-वर्ग का अतिव्यापन होना अनिवार्य है। ‘कुछ ढोल कौवे हैं’ संबंध कथनों द्वारा अनिवार्य होता है।

  4. ‘कुछ ढोल पिन हैं’ केवल ढोल-वर्ग और पिन-वर्ग के बीच अतिव्यापन निश्चित करता है। चप्पल ढोल-वर्ग के केवल एक भाग में स्थित हैं, इसलिए पिन के साथ साझा ढोल-क्षेत्र पूरी तरह चप्पल-क्षेत्र के बाहर हो सकता है।

  5. अतः पिन–चप्पल संबंध ऐसी संभावना है जिसकी कथन अनुमति देते हैं, न कि ऐसा परिणाम जिसे वे अनिवार्य बनाते हैं; इसलिए ‘कुछ पिन चप्पल हैं’ अनिवार्य नहीं है।

पुनः जाँच

पिन–चप्पल संबंध के लिए प्रति-व्यवस्था: ढोल का एक बड़ा वृत्त बनाएँ, उसके भीतर चप्पल का एक छोटा वृत्त रखें जो कौवों के वृत्त के भीतर भी स्थित हो, और पिन के वृत्त को ढोल के वृत्त के ऐसे क्षेत्र में काटते हुए बनाएँ जो चप्पलों से असंयुक्त हो। तीनों कथन सत्य रहते हैं, फिर भी कोई पिन चप्पल नहीं है; इससे यह संबंध अस्वीकार हो जाता है। कोई भी व्यवस्था ढोलों को कौवों से पूरी तरह अलग नहीं कर सकती, क्योंकि चप्पलों का दोनों के भीतर होना अनिवार्य है; इसलिए ढोल–कौवे संबंध प्रत्येक व्यवस्था में बना रहता है।

परिणाम

दिए गए कथनों से केवल निष्कर्ष (II), ‘कुछ ढोल कौवे हैं’, तार्किक रूप से अनुसरण करता है।

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