श्री हर्ष का संबंध निम्नलिखित में से किस ग्रंथ से है?

2025

श्री हर्ष का संबंध निम्नलिखित में से किस ग्रंथ से है?

  1. A.

    नैषध चरित

  2. B.

    नवरत्न

  3. C.

    गाथासप्तशती

  4. D.

    भवानी मंदिर

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Correct answer: A

संस्कृत साहित्य के इतिहास में एक ही नाम ‘हर्ष’ से दो भिन्न प्रसिद्ध व्यक्तित्व जुड़े हैं — सम्राट हर्षवर्धन (7वीं शताब्दी), जिन्हें रत्नावली, प्रियदर्शिका तथा नागानन्द नाटकों का रचयिता माना जाता है और जिनके दरबारी कवि बाणभट्ट ने ‘हर्षचरित’ की रचना की; तथा कवि श्रीहर्ष (12वीं शताब्दी), जो महाकाव्य ‘नैषधचरित’ (नल-दमयन्ती की कथा पर आधारित) के रचयिता हैं। परीक्षाओं में इन दोनों समनाम व्यक्तित्वों को पृथक् रखने की क्षमता परखी जाती है।

प्रश्न में उल्लिखित ‘श्री हर्ष’ कवि श्रीहर्ष हैं, सम्राट हर्षवर्धन नहीं — क्योंकि हर्षवर्धन को प्रचलित रूप से ‘श्री हर्ष’ कहकर संबोधित नहीं किया जाता और दिए गए विकल्पों में उनकी किसी रचना का उल्लेख भी नहीं है। श्रीहर्ष की सर्वाधिक प्रसिद्ध रचना ‘नैषधचरित’ (नैषध चरित) महाकाव्य है, जो संस्कृत के पंचमहाकाव्यों में गिना जाता है और नल-दमयन्ती की प्रेम-कथा पर आधारित है।

शेष विकल्पों की जाँच करने पर: ‘गाथासप्तशती’ प्राकृत भाषा की मुक्तक पद्यों की संकलित रचना है, जिसका संकलन सातवाहन शासक हाल द्वारा माना जाता है; ‘भवानी मंदिर’ सन् 1905 में प्रकाशित एक राजनैतिक पुस्तिका है, जिसका मूल विचार बारीन्द्र कुमार घोष का था किन्तु जिसका पाठ श्री अरविन्द द्वारा लिखा गया माना जाता है; तथा ‘नवरत्न’ सम्राट विक्रमादित्य के दरबार के नौ विख्यात विद्वानों के समूह को कहा जाता है, यह किसी ग्रंथ का शीर्षक नहीं है। इनमें से कोई भी श्रीहर्ष से संबद्ध नहीं है, अतः केवल ‘नैषध चरित’ ही श्रीहर्ष से जुड़ा हुआ सुसंगत उत्तर है।

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