भारत के निम्नलिखित में से किस राज्य से सत्त्रिया नृत्य संबंधित है?

2025

भारत के निम्नलिखित में से किस राज्य से सत्त्रिया नृत्य संबंधित है?

Answer: C. असमअवधारणाभारत में किसी नृत्य-शैली को शास्त्रीय तब कहा जाता है, जब संगीत नाटक अकादमी उसे मान्यता देती है। मान्यताप्राप्त आठों शास्त्रीय नृत्य-शैलियाँ उस विशिष्ट…

  1. A.

    कर्नाटक

  2. B.

    उत्तर प्रदेश

  3. C.

    असम

  4. D.

    हिमाचल प्रदेश

Attempted by 4 students.

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Correct answer: C

अवधारणा

भारत में किसी नृत्य-शैली को शास्त्रीय तब कहा जाता है, जब संगीत नाटक अकादमी उसे मान्यता देती है। मान्यताप्राप्त आठों शास्त्रीय नृत्य-शैलियाँ उस विशिष्ट समुदाय, मंदिर या मठीय संस्था से जुड़ी हैं, जिसने सदियों से उनकी प्रस्तुति-परंपरा को संरक्षित रखा है। अतः किसी शास्त्रीय नृत्य-शैली का क्षेत्र निर्धारित करने के लिए उस संस्था का पता लगाना चाहिए, जिसके अनुष्ठानिक जीवन से उसका उद्भव हुआ था, न कि उन स्थानों का जहाँ आज उसका प्रदर्शन किया जाता है।

इस प्रश्न पर अवधारणा का प्रयोग

  1. सत्त्रिया नाम ‘सत्र’ से निकला है। सत्र वे वैष्णव मठीय संस्थाएँ हैं, जिनकी स्थापना पंद्रहवीं और सोलहवीं शताब्दी में संत एवं समाज-सुधारक श्रीमंत शंकरदेव ने की थी।

  2. ये सत्र ब्रह्मपुत्र घाटी में स्थापित किए गए थे, जहाँ भकत कहलाने वाले ब्रह्मचारी संन्यासी आज भी दैनिक उपासना के रूप में तथा अंकिया नाट भक्तिपरक नाट्य के अंग के रूप में यह नृत्य प्रस्तुत करते हैं।

  3. संगीत नाटक अकादमी ने वर्ष 2000 में सत्र की इस प्रस्तुति-परंपरा को भारत के आठवें शास्त्रीय नृत्य के रूप में मान्यता दी थी। संस्कृति मंत्रालय इसके उद्गम-स्थल के रूप में उसी राज्य को दर्ज करता है, जहाँ ये मठ स्थित हैं।

अतः संस्था का पता लगाने पर उत्तर असम मिलता है—ब्रह्मपुत्र घाटी की सत्र परंपरा ही सत्त्रिया का उद्गम-स्थल है।

अन्य राज्यों से मिलान

राज्य

विशिष्ट नृत्य-परंपरा

प्रकार

असम

सत्त्रिया—श्रीमंत शंकरदेव के सत्र मठों से उद्भूत

शास्त्रीय

कर्नाटक

यक्षगान—तटीय जिलों का रात्रिभर चलने वाला लोकनाट्य

लोक

उत्तर प्रदेश

कथक—लखनऊ और बनारस घरानों की परंपरा

शास्त्रीय

हिमाचल प्रदेश

नाटी—कुल्लू और सिरमौर घाटियों का वृत्ताकार सामुदायिक नृत्य

लोक

यह मिलान सही सिद्ध होता है, क्योंकि यहाँ दिए गए अन्य राज्यों में से प्रत्येक किसी भिन्न परंपरा का उद्गम-स्थल है। यक्षगान और नाटी लोकनृत्य-रूप हैं, जबकि उत्तर प्रदेश का शास्त्रीय नृत्य कथक है। अतः इनमें से किसी भी राज्य में सत्र-आधारित सत्त्रिया प्रस्तुति-परंपरा नहीं है।

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