फर्मों द्वारा प्राप्त कुल _________ का भुगतान उत्पादन के कारकों को किया जाता…
2025
फर्मों द्वारा प्राप्त कुल _________ का भुगतान उत्पादन के कारकों को किया जाता है, यह समग्र ________ का रूप ले लेता है।
Answer: A. राजस्व ; आय — अवधारणा: आय के चक्रीय प्रवाह में उत्पादन की एक क्रिया दो समान मौद्रिक प्रवाह उत्पन्न करती है। कोई फर्म अपने द्वारा उत्पादित उत्पादन को बेचकर जो राशि प्राप्त…
- A.
राजस्व ; आय
- B.
अंतर्वाह ; बहिर्वाह
- C.
माल ; सेवाएँ
- D.
उत्पादन ; उपभोग
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Correct answer: A
अवधारणा: आय के चक्रीय प्रवाह में उत्पादन की एक क्रिया दो समान मौद्रिक प्रवाह उत्पन्न करती है। कोई फर्म अपने द्वारा उत्पादित उत्पादन को बेचकर जो राशि प्राप्त करती है, वह उसका राजस्व है और उस प्राप्ति की पूरी राशि फिर उत्पादन के कारकों—श्रम, भूमि, पूँजी और उद्यमिता—के स्वामियों में वितरित कर दी जाती है, जहाँ उसी धन को आय कहा जाता है। अतः समग्र राजस्व और समग्र आय एक ही लेन-देन के दो सिरों से देखा गया एक ही प्रवाह है।
इस वाक्य पर अनुप्रयोग:
पहला रिक्त स्थान बताता है कि फर्में क्या प्राप्त करती हैं। किसी फर्म द्वारा अपने उत्पादित माल और सेवाओं की बिक्री से प्राप्त राशि उसका राजस्व होती है; इसलिए सभी फर्मों की ऐसी प्राप्तियों का कुल योग समग्र राजस्व है।
इसके बाद वाक्य में कहा गया है कि यह कुल राशि उत्पादन के कारकों, अर्थात् श्रम, भूमि, पूँजी और उद्यमिता को भुगतान कर दी जाती है।
इन कारकों के स्वामियों को किए गए भुगतान मजदूरी, लगान, ब्याज और लाभ के रूप में होते हैं। इन कारक भुगतानों को संयुक्त रूप से आय कहा जाता है; इसलिए दूसरे रिक्त स्थान में समग्र आय आएगी।
अतः पूर्ण कथन इस प्रकार है: फर्मों द्वारा प्राप्त समग्र राजस्व का भुगतान उत्पादन के कारकों को किया जाता है और वह समग्र आय का रूप लेता है।
दिए गए अन्य युग्मों से मिलान:
अंतर्वाह; बहिर्वाह केवल किसी क्षेत्रक या खाते के सापेक्ष मौद्रिक प्रवाह की दिशा बताते हैं; इसलिए इनमें से कोई भी शब्द न तो फर्म द्वारा अर्जित प्राप्ति का नाम है और न ही किसी कारक-स्वामी द्वारा अर्जित आय का।
माल; सेवाएँ उत्पादन के उस वास्तविक प्रवाह का नाम हैं जो फर्मों से परिवारों की ओर जाता है; इसकी गणना भौतिक उत्पादन में की जाती है, न कि प्राप्त या भुगतान किए जाने वाले धन में।
उत्पादन; उपभोग अर्थव्यवस्था में की जाने वाली गतिविधियों के नाम हैं; इसलिए इनमें से कोई भी शब्द उस मौद्रिक राशि को व्यक्त नहीं कर सकता जिसे कोई फर्म प्राप्त करती है या कारक-स्वामियों को भुगतान करती है।
यही सर्वसमिका स्पष्ट करती है कि राष्ट्रीय आय का अनुमान या तो बेचे गए उत्पादन के मूल्य के रूप में अथवा भुगतान की गई कारक आयों के योग के रूप में लगाया जा सकता है। इसी पर राष्ट्रीय आय के मापन की मूल्य वर्धित विधि और आय विधि आधारित हैं।