मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मुख्य रूप से…
2025
मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मुख्य रूप से किस विकल्प का उपयोग किया जाता है?
- A.
सार्वजनिक व्यय में कमी
- B.
प्रत्यक्ष करों में वृद्धि
- C.
रेपो दर को समायोजित करना
- D.
निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण करना
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Correct answer: C
अवधारणा: मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मुख्यतः मौद्रिक नीति (Monetary Policy) के औजारों का उपयोग करता है। तरलता समायोजन सुविधा (LAF) के अंतर्गत रेपो दर (Repo Rate) — वह दर जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को सरकारी प्रतिभूतियों के बदले अल्पकालिक ऋण देता है — इसका प्रमुख नीतिगत साधन है। रेपो दर बढ़ाने से ऋण महंगा होता है, मुद्रा आपूर्ति और समग्र मांग घटती है, जिससे मुद्रास्फीति नियंत्रित होती है; रेपो दर घटाने पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है। यह सरकार द्वारा प्रयुक्त राजकोषीय नीति से भिन्न, RBI का मौद्रिक नीति उपकरण है।
अनुप्रयोग: दिए गए विकल्पों में "रेपो दर को समायोजित करना" ठीक यही मौद्रिक नीति साधन है — मौद्रिक नीति समिति (MPC) समय-समय पर होने वाली नीति समीक्षाओं में इसी दर का उपयोग करके मुद्रास्फीति को RBI के लक्ष्य दायरे (4% ± 2%) के भीतर बनाए रखती है।
तुलना: शेष विकल्प इस मौद्रिक साधन से भिन्न प्रकृति के हैं:
सार्वजनिक व्यय में कमी — केंद्र सरकार द्वारा बजट के माध्यम से अपनाया जाने वाला राजकोषीय नीति उपकरण है, RBI का मौद्रिक साधन नहीं।
प्रत्यक्ष करों में वृद्धि — वित्त मंत्रालय/संसद द्वारा तय किया जाने वाला राजकोषीय उपाय है, RBI के अधिकार-क्षेत्र से बाहर है।
निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण करना — एक संरचनात्मक/स्वामित्व-संबंधी नीतिगत निर्णय है (1969 व 1980 में हुआ), जिसका अल्पकालिक मुद्रास्फीति प्रबंधन से सीधा संबंध नहीं है।
निष्कर्ष: RBI अधिनियम, 1934 में 2016 के संशोधन के बाद मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से MPC को रेपो दर के माध्यम से दी गई है, इसलिए सही विकल्प "रेपो दर को समायोजित करना" है।