संथाल विद्रोह (1855-56) का नेतृत्व किसने किया था?
2025
संथाल विद्रोह (1855-56) का नेतृत्व किसने किया था?
Answer: D. सिद्धू और कान्हू — संकल्पनाऔपनिवेशिक भारत में किसी विद्रोह का नेतृत्व किसने किया, यह उस विशिष्ट आंदोलन के ऐतिहासिक अभिलेख के आधार पर निर्धारित किया जाता है, न कि सामान्य धारणा…
- A.
रानी गाइदिनल्यू
- B.
बिरसा मुंडा
- C.
तात्या टोपे
- D.
सिद्धू और कान्हू
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Correct answer: D
संकल्पना
औपनिवेशिक भारत में किसी विद्रोह का नेतृत्व किसने किया, यह उस विशिष्ट आंदोलन के ऐतिहासिक अभिलेख के आधार पर निर्धारित किया जाता है, न कि सामान्य धारणा के आधार पर। तीन प्रमाणित तथ्य मिलकर उसकी पहचान सुनिश्चित करते हैं—विद्रोह करने वाला समुदाय या सामाजिक समूह, वह क्षेत्र जहाँ विद्रोह का आधार था, और वह काल जिसमें वह भड़का था।
कोई नाम तभी उत्तर माना जाएगा, जब अभिलेख उस व्यक्ति को एक साथ तीनों तथ्यों से जोड़ता हो; किसी भिन्न आंदोलन, भिन्न क्षेत्र या भिन्न दशक से संबद्ध अभिलिखित व्यक्ति पूछे गए आंदोलन का नेता नहीं हो सकता। उन्नीसवीं शताब्दी के जनजातीय (आदिवासी) विद्रोहों की पहचान का आधार प्रायः वह असंतोष होता है जिससे उनका उदय हुआ—पारंपरिक भूमि से बेदखली, साहूकारों के ऋण के कारण बंधुआगीरी, अथवा नए भू-राजस्व एवं वन नियम—क्योंकि ऐसे असंतोष सामान्यतः किसी विशिष्ट भू-भाग में सामूहिक रूप से अनुभव किए जाते थे और वहीं बसे समुदाय की जनता इन विद्रोहों की अनुयायी बनती थी, भले ही पड़ोसी समूह भी उन्हीं दबावों का सामना कर रहे हों।
प्रयोग
1855–56 का संथाल हूल राजमहल की पहाड़ियों के दामिन-ए-कोह क्षेत्र (वर्तमान झारखंड) में बसे संथाल समुदाय का विद्रोह था। शिकायत ज़मींदारों, महाजनों और कंपनी के लगान व पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध थी, जिन्हें मिलाकर “दिकू” कहा जाता था; उनके कर्ज़ और लगान की वसूली संथालों से वह भूमि छीन रही थी जिसे उन्होंने स्वयं साफ़ किया था।
30 जून 1855 को भोगनाडीह गाँव में समुदाय की विशाल सभा बुलाई गई, जहाँ मुर्मू बंधु सिद्धू और कान्हू ने — अपने भाई चांद व भैरव और बहनों फूलो व झानो के साथ — विद्रोह की घोषणा की और नेता स्वीकारे गए।
इस विद्रोह पर तीनों कसौटियाँ लगाएं: समुदाय = संथाल, क्षेत्र = राजमहल की पहाड़ियों का दामिन-ए-कोह, काल = 1855–56। इन तीनों पर खरा उतरने वाला नेतृत्व सिद्धू और कान्हू का है।
प्रति-जाँच
सिद्धू और कान्हू मुर्मू — संथाल समुदाय, दामिन-ए-कोह, 1855–56: समुदाय, क्षेत्र और काल — तीनों मेल खाते हैं, यही पूछा गया नेतृत्व है।
बिरसा मुंडा — मुंडा समुदाय, छोटानागपुर पठार, 1899–1900 का उलगुलान: भिन्न समुदाय और लगभग पैंतालीस वर्ष बाद का।
रानी गाइदिनल्यू — ज़ेलियांग्रोंग नागा, मणिपुर–नागालैंड की पहाड़ियाँ, 1930 के दशक का हेराका आंदोलन: भिन्न समुदाय, भिन्न क्षेत्र और भिन्न सदी का दशक।
तात्या टोपे — 1857 के विद्रोह में कानपुर–कालपी–ग्वालियर रणक्षेत्र के मराठा सेनानायक: यह सिपाही और रियासती विद्रोह था, जनजातीय नहीं।
परिणाम: 1855–56 के संथाल विद्रोह का नेतृत्व सिद्धू और कान्हू (मुर्मू) ने किया था।