निम्नलिखित में से कौन-सा, निर्वाह खेती का एक उदाहरण है?
2025
निम्नलिखित में से कौन-सा, निर्वाह खेती का एक उदाहरण है?
Answer: C. पूर्वोत्तर भारत में चावल की खेती — निर्वाह खेती (subsistence farming) वह कृषि पद्धति है जिसमें किसान अपने परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए फसल उगाता है; भूमि-जोत छोटी होती है, श्रम अधिक व…
- A.
गुजरात में कपास की खेती
- B.
असम में चाय की खेती
- C.
पूर्वोत्तर भारत में चावल की खेती
- D.
महाराष्ट्र में गन्ने की खेती
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Correct answer: C
निर्वाह खेती (subsistence farming) वह कृषि पद्धति है जिसमें किसान अपने परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए फसल उगाता है; भूमि-जोत छोटी होती है, श्रम अधिक व तकनीक पारंपरिक होती है, और विक्रय-योग्य अधिशेष बहुत कम या शून्य के बराबर होता है। इसके विपरीत, व्यावसायिक (नकदी) खेती में फसल बड़े पैमाने पर बाज़ार या निर्यात हेतु उगाई जाती है, जैसे कपास, चाय और गन्ना।
दिए गए विकल्पों में पूर्वोत्तर भारत में चावल की खेती पहाड़ी क्षेत्रों में प्रायः छोटी जोतों पर, अक्सर स्थानांतरी (झूम) कृषि द्वारा की जाती है, और उपज मुख्यतः कृषक परिवार के स्वयं के उपभोग हेतु होती है — यही निर्वाह खेती की मानक पहचान है। शेष तीन विकल्पों की जाँच करने पर:
गुजरात में कपास की खेती: सौराष्ट्र-कच्छ की काली (रेगुर) मिट्टी वाले क्षेत्रों में वस्त्र उद्योग हेतु बड़े पैमाने पर नकदी फसल के रूप में उगाई जाती है।
असम में चाय की खेती: बड़े बागानों (plantations) में घरेलू व निर्यात व्यापार के लिए वाणिज्यिक स्तर पर उगाई जाती है।
महाराष्ट्र में गन्ने की खेती: दक्कन के सिंचित क्षेत्रों में चीनी मिलों हेतु कच्चे माल के रूप में व्यावसायिक स्तर पर उगाई जाती है।
ये तीनों वाणिज्यिक/बागाती खेती के उदाहरण हैं, निर्वाह खेती के नहीं। NCERT एवं NIOS की भूगोल पाठ्य-सामग्री में कपास, चाय व गन्ने को वाणिज्यिक/बागाती फसलों के रूप में तथा पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत में चावल की खेती — चाहे मैदानी भागों में गहन (intensive) रूप में हो या पहाड़ी भागों में स्थानांतरी झूम पद्धति से — निर्वाह खेती के मानक उदाहरण के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
अतः सही उत्तर है: पूर्वोत्तर भारत में चावल की खेती।