जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत में चार चरण शामिल हैं। किस चरण…

2025

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत में चार चरण शामिल हैं। किस चरण में बच्चा संरक्षण की अवधारणा को समझना शुरू करता है—अर्थात, आकृति या स्वरूप में परिवर्तन के बावजूद मात्रा समान रहती है?

  1. A.

    संवेदी-पेशीय (Sensorimotor)

  2. B.

    मूर्त संक्रियात्मक (Concrete operational)

  3. C.

    औपचारिक संक्रियात्मक (Formal operational)

  4. D.

    पूर्व-संक्रियात्मक (Preoperational)

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Correct answer: B

पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत बच्चों के मानसिक विकास को चार क्रमबद्ध चरणों में बांटता है, जिनमें से प्रत्येक चरण बच्चे की वस्तुओं और विचारों पर मानसिक संक्रियाएं (operations) करने की क्षमता से परिभाषित होता है।

संरक्षण (conservation) — यह समझ कि किसी वस्तु की मात्रा (संख्या, द्रव्यमान, आयतन, लंबाई) उसके भौतिक स्वरूप या व्यवस्था में परिवर्तन के बावजूद समान रहती है — विशेष रूप से मूर्त संक्रियात्मक चरण (लगभग 7 से 11 वर्ष) में विकसित होती है। इस चरण में बच्चे "संक्रियात्मक" चिंतन प्राप्त कर लेते हैं: वे किसी परिवर्तन को मानसिक रूप से उलट सकते हैं (उत्क्रमणीयता/reversibility) और एक साथ एक से अधिक आयामों पर ध्यान दे सकते हैं (बहु-आयामी ध्यान/decentration), इसलिए वे केवल वस्तु के दिखने के तरीके पर निर्भर नहीं रहते।

अन्य चरणों से तुलना:

  • पूर्व-संक्रियात्मक चरण (लगभग 2-7 वर्ष): बच्चों में उत्क्रमणीयता और बहु-आयामी ध्यान की कमी होती है, इसलिए वे तरल-संरक्षण जैसे शास्त्रीय परीक्षणों में केवल दिखावटी परिवर्तन से भ्रमित हो जाते हैं।

  • संवेदी-पेशीय चरण (लगभग 0-2 वर्ष): चिंतन प्रतीक-पूर्व होता है, इसलिए संरक्षण जैसा प्रश्न इस अवस्था में अर्थपूर्ण भी नहीं होता।

  • औपचारिक संक्रियात्मक चरण (लगभग 11+ वर्ष): इसमें अमूर्त एवं परिकल्पनात्मक चिंतन जुड़ता है, जो मूर्त संक्रियात्मक चरण में पहले से स्थापित संरक्षण जैसी क्षमताओं के ऊपर निर्मित होता है।

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