विद्यार्थियों में सौंदर्यपरक संवेदनग्राहिता (aesthetic sensibility) विकसित…
2025
विद्यार्थियों में सौंदर्यपरक संवेदनग्राहिता (aesthetic sensibility) विकसित करने से उन्हें ________ में सहायता मिलती है।
- A.
कलात्मक रूढ़ियों का सख्ती से पालन करने
- B.
पेंटिंग की पारंपरिक विधियों की आलोचना करने
- C.
कलात्मक शब्दों को शीघ्र स्मरण करने
- D.
अपने आसपास के क्षेत्र का मूल्यांकन करने और उससे जुड़ने
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Correct answer: D
अवधारणा
सौंदर्यपरक संवेदनग्राहिता (aesthetic sensibility) का अर्थ है सुंदरता, रूप, रंग, अनुपात और अभिव्यक्ति को गहराई से अनुभव करने, सराहने और मूल्यांकन करने की क्षमता। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) 2005 के अनुसार, कला शिक्षा का मूल उद्देश्य बच्चों में यह संवेदनशीलता विकसित करना है ताकि वे अपने परिवेश, संस्कृति और समाज को गहराई से समझ सकें, उसका मूल्यांकन कर सकें और उससे सार्थक रूप से जुड़ सकें।
अनुप्रयोग
दिए गए विकल्पों का विश्लेषण निम्नानुसार किया जा सकता है:
कलात्मक रूढ़ियों का सख्ती से पालन करना रचनात्मकता को सीमित करता है और सौंदर्यबोध के विकास से मेल नहीं खाता, क्योंकि सौंदर्यबोध मौलिक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करता है।
पारंपरिक विधियों की आलोचना करना केवल तकनीकी मूल्यांकन तक सीमित एक कौशल है, जबकि सौंदर्यबोध का दायरा कहीं व्यापक है।
कलात्मक शब्दों का स्मरण करना सूचनात्मक ज्ञान है, संवेदनशीलता का प्रत्यक्ष परिणाम नहीं।
अपने आसपास के क्षेत्र का मूल्यांकन करना और उससे जुड़ना ठीक वही परिणाम है जो सौंदर्यपरक संवेदनग्राहिता के विकास से अपेक्षित है — बच्चे अपने परिवेश को गहराई से समझने, सराहने और उससे भावनात्मक-बौद्धिक रूप से जुड़ने में सक्षम होते हैं।
जांच
NCF 2005 के कला शिक्षा संबंधी स्थिति-पत्र (Position Paper on Arts Education) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कला शिक्षा का लक्ष्य बच्चों को अपने पर्यावरण और जीवन के साथ संवेदनशील जुड़ाव विकसित करने में सक्षम बनाना है, न कि तकनीकी दक्षता या स्मृति-आधारित ज्ञान अर्जित कराना। यह पुष्टि करता है कि अपने परिवेश का मूल्यांकन और उससे जुड़ाव ही सही उत्तर है।