निम्नलिखित में से कौन-सा, विकास की प्रमुख विशेषता है?
2025
निम्नलिखित में से कौन-सा, विकास की प्रमुख विशेषता है?
Answer: B. यह एक गुणात्मक परिवर्तन होता है। — संकल्पना: विकासात्मक मनोविज्ञान में वृद्धि और विकास का भेद उनके द्वारा सूचित परिवर्तन के प्रकार के आधार पर किया जाता है। वृद्धि मात्रात्मक परिवर्तन है—आकार,…
- A.
यह किशोरावस्था के बाद रुक जाता है।
- B.
यह एक गुणात्मक परिवर्तन होता है।
- C.
यह सामाजिक प्रभाव से अप्रभावित रहता है।
- D.
यह शरीर की ऊँचाई तक सीमित होता है।
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Correct answer: B
संकल्पना: विकासात्मक मनोविज्ञान में वृद्धि और विकास का भेद उनके द्वारा सूचित परिवर्तन के प्रकार के आधार पर किया जाता है। वृद्धि मात्रात्मक परिवर्तन है—आकार, भार, ऊँचाई अथवा संख्या में ऐसी मापनीय बढ़ोतरी, जिसे इकाइयों में व्यक्त किया जा सकता है। विकास गुणात्मक परिवर्तन है—संरचना, संगठन और कार्यशीलता में प्रगतिशील परिवर्तन, जो केवल मात्रा बढ़ाने के बजाय व्यक्ति की कार्य-क्षमता के स्वरूप को बदलता है। विकास को जीवन-पर्यंत तथा शारीरिक, संज्ञानात्मक, संवेगात्मक, सामाजिक, नैतिक और भाषायी आयामों में बहुआयामी माना जाता है; यह वंशानुक्रम और सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण की सतत अंतःक्रिया से निर्मित होता है।
आधार | वृद्धि | विकास |
|---|---|---|
परिवर्तन की प्रकृति | मात्रात्मक; इकाइयों में मापनीय | गुणात्मक; स्वरूप और संगठन में परिवर्तन |
अवधि | परिपक्वता प्राप्त होने पर रुक जाती है | संपूर्ण जीवन-काल में जारी रहता है |
क्षेत्र | शरीर का आकार और संरचना | शारीरिक, संज्ञानात्मक, सामाजिक, संवेगात्मक और नैतिक क्षेत्र |
अनुप्रयोग: इस परिभाषा को दिए गए कथनों पर लागू करने से विकास की पहचान करने वाला गुण यह है कि वह गुणात्मक परिवर्तन होता है। उदाहरणार्थ, बालक का मूर्त एवं प्रत्यक्षीकरण-बद्ध चिंतन से अमूर्त परिकल्पनात्मक तर्क की ओर बढ़ना मात्रा में वृद्धि नहीं, बल्कि उपलब्ध चिंतन के स्वरूप में परिवर्तन है; बड़बड़ाने से व्याकरणसम्मत वाणी की ओर बढ़ना भी ऐसा ही परिवर्तन है।
अन्य कथनों से मिलान:
“यह किशोरावस्था के बाद रुक जाता है।”—पॉल बाल्टेस से संबद्ध जीवन-पर्यंत दृष्टिकोण के अनुसार विकासात्मक परिवर्तन प्रारंभिक, मध्य और उत्तर प्रौढ़ावस्था तक जारी रहता है तथा प्रत्येक अवस्था के अपने विकासात्मक कार्य होते हैं; अतः विकास किशोरावस्था के बाद नहीं रुकता।
“यह सामाजिक प्रभाव से अप्रभावित रहता है।”—अंतःक्रियावादी दृष्टिकोण विकास को वंशानुक्रम और वातावरण का संयुक्त परिणाम मानता है; परिवार, समवयस्क, विद्यालय और संस्कृति वातावरणीय निर्धारक हैं, अतः विकास सामाजिक प्रभाव से पृथक नहीं रहता।
“यह शरीर की ऊँचाई तक सीमित होता है।”—ऊँचाई में वृद्धि शारीरिक आयाम का एक माप है, जबकि विकास में संज्ञानात्मक, संवेगात्मक, सामाजिक, नैतिक और भाषायी क्षेत्र भी सम्मिलित होते हैं।
अतः दिए गए कथनों में विकास की प्रमुख विशेषता यह है कि वह गुणात्मक परिवर्तन होता है।