कशेरुकियों में यकृत कोशिकाएँ कई विषों और दवाओं को ............. के माध्यम से…

2025

कशेरुकियों में यकृत कोशिकाएँ कई विषों और दवाओं को ............. के माध्यम से विषमुक्त करती हैं।

  1. A.

    गॉल्जी उपकरण

  2. B.

    खुरदरी अंतर्द्रव्यी जालिका

  3. C.

    लाइसोसोम

  4. D.

    चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका

Attempted by 6 students.

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Correct answer: D

संकल्पना: अंतर्द्रव्यी जालिका दो ऐसी संरचनात्मक एवं कार्यात्मक रूप से भिन्न अवस्थाओं में पाई जाती है—खुरदरी अंतर्द्रव्यी जालिका और चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका। खुरदरी अंतर्द्रव्यी जालिका की सतह पर राइबोसोम लगे होते हैं और यह स्राव, झिल्लियों अथवा अन्य कोशिकांगों के लिए निर्धारित प्रोटीनों के संश्लेषण एवं प्रारंभिक वलन हेतु विशिष्टीकृत होती है। चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका पर राइबोसोम नहीं होते; लिपिडों और स्टेरॉइडों के संश्लेषण के अतिरिक्त इसमें मिश्र-कार्य ऑक्सीडेज एंजाइमों का साइटोक्रोम पी450 परिवार उपस्थित होता है। ये एंजाइम औषधियों, विषों तथा अन्य वसा-विलेय बाह्यजैविक यौगिकों का प्रथम-प्रावस्था ऑक्सीकारी उपापचय करते हैं और उन्हें अधिक जल-विलेय रूपों में परिवर्तित करते हैं, ताकि कोशिका उनका आगे संसाधन करके उत्सर्जन कर सके।

अनुप्रयोग: यकृत कोशिकाओं में इसी एंजाइमी भूमिका के कारण चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका असामान्य रूप से सुविकसित होती है। जब अवशोषित औषधियों, ऐल्कोहॉल के उपापचयजों, पीड़कनाशकों तथा अन्य आविषों को वहन करने वाला रक्त यकृत से होकर गुजरता है, तब चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका पर स्थित साइटोक्रोम पी450 तंत्र इन यौगिकों का ऑक्सीकरण करके उन्हें निष्प्रभावी करता है अथवा शरीर से निष्कासन के लिए तैयार करता है। प्रश्न में पूछे गए अनुसार, इसी संरचना के माध्यम से यकृत कोशिकाएँ विषों और औषधियों का विषहरण करती हैं।

जाँच: औषध-विज्ञान का एक उत्कृष्ट प्रेक्षण इसकी पुष्टि करता है—जब किसी प्राणी अथवा व्यक्ति को कुछ औषधियों, जैसे फीनोबार्बिटल, के संपर्क में बार-बार लाया जाता है, तब यकृत कोशिकाओं में चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका का मापनीय प्रसार होता है, क्योंकि बढ़े हुए औषधि-भार से निपटने के लिए कोशिका को विषहरणकारी एंजाइमों हेतु अधिक सतही क्षेत्रफल की आवश्यकता होती है। यह स्वतंत्र कार्यिकीय प्रमाण यकृतीय विषहरण के स्थल के रूप में चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका की पुष्टि करता है।

  • गॉल्जी उपकरण: यह अंतर्द्रव्यी जालिका से प्राप्त प्रोटीनों और लिपिडों का रूपांतरण, छँटाई तथा संवेष्टन करके उन्हें स्राव अथवा अन्य कोशिकांगों तक पहुँचाने हेतु पुटिकाओं में भरता है; यह औषधियों या विषों के उपापचय का प्राथमिक स्थल नहीं है।

  • खुरदरी अंतर्द्रव्यी जालिका: यह अपनी राइबोसोम-युक्त सतह पर प्रोटीनों का संश्लेषण और वलन करती है; इसकी भूमिका प्रोटीन-उत्पादन है, न कि छोटे वसा-विलेय अणुओं का ऑक्सीकारी विषहरण।

  • लाइसोसोम: यह अपघटनी एंजाइमों द्वारा वृहदणुओं, जीर्ण कोशिकांगों तथा निगले गए पदार्थों का विघटन करता है; यह अंतःकोशिकीय पाचन है, जो साइटोक्रोम पी450 एंजाइमों द्वारा किए जाने वाले प्रथम-प्रावस्था ऑक्सीकारी विषहरण से भिन्न है।

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