किसी सामान्य उपचार संयंत्र में निम्नलिखित में कौन सा कठोर भूमिगत जल के उपचार…

2024

किसी सामान्य उपचार संयंत्र में निम्नलिखित में कौन सा कठोर भूमिगत जल के उपचार का प्रारंभ से अंतिम चरण तक सही क्रम है?

(A) असंक्रमण / विसंक्रमण (डिसइंफेक्शन)

(B) मुलायम बनाना / मृदुकरण (सॉफ्टनिंग)

(C) वायुवीकरण (एयरेशन)

(D) निस्पंदन (फिल्ट्रेशन)

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Answer: A. (C), (B), (D), (A)संकल्पना। जल-उपचार संयंत्र में इकाई प्रक्रियाओं का क्रम एक ही सिद्धांत से तय होता है — प्रत्येक चरण वह भार हटाए जिसे अगला चरण नहीं संभाल सकता। इसलिए पहले घुली…

  1. A.

    (C), (B), (D), (A)

  2. B.

    (C), (B), (A), (D)

  3. C.

    (D), (B), (C), (A)

  4. D.

    (D), (B), (A), (C)

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Correct answer: A

संकल्पना। जल-उपचार संयंत्र में इकाई प्रक्रियाओं का क्रम एक ही सिद्धांत से तय होता है — प्रत्येक चरण वह भार हटाए जिसे अगला चरण नहीं संभाल सकता। इसलिए पहले घुली हुई गैसें और ऑक्सीकरणीय धातुएँ निकाली जाती हैं, फिर घुले हुए कठोरता-कारक आयन हटाने योग्य रूप में बदले जाते हैं, फिर बने हुए ठोस भौतिक रूप से छान लिए जाते हैं, और रोगाणुनाशन सदैव सबसे अंत में रखा जाता है ताकि कीटाणुनाशक पहले से निर्मल जल पर कार्य करे और — क्लोरीन या क्लोरैमीन जैसे अवशेष-कारी कीटाणुनाशक की स्थिति में — वितरण तंत्र तक रक्षात्मक अवशिष्ट के रूप में बना रहे।

अनुप्रयोग। कठोर भूमिगत जल पर यही सिद्धांत लागू करने पर दिए गए चारों चरण इस क्रम में आते हैं:

  1. वायुवीकरण (एयरेशन) — भूमिगत जल ऑक्सीजन-रहित होता है तथा उसमें घुली CO2, H2S और अपचयित Fe2+ व Mn2+ रहते हैं। वायु के संपर्क से ये गैसें निकल जाती हैं और लोहा तथा मैंगनीज ऑक्सीकृत होकर अघुलनशील हाइड्रॉक्साइड बन जाते हैं; CO2 हटने से pH भी बढ़ता है, जिससे आगे चूने की माँग घट जाती है।

  2. मुलायम बनाना / मृदुकरण (सॉफ्टनिंग) — कठोरता वास्तव में इसी चरण में हटती है। सामान्य संयंत्र में चूना-सोडा विधि Ca2+ और Mg2+ को CaCO3 तथा Mg(OH)2 के रूप में अवक्षेपित करती है, जिससे बड़ी मात्रा में रासायनिक फ्लॉक बनता है; आयन-विनिमय वैकल्पिक विधि है, जो इन आयनों को रेज़िन पर स्थानांतरित करती है और ऐसा अवक्षेप नहीं बनाती। इसी परंपरागत अवक्षेपण विधि के कारण अगला चरण अपने स्थान पर आता है।

  3. निस्पंदन (फिल्ट्रेशन) — अवक्षेपण-मृदुकरण से बना कार्बोनेट-हाइड्रॉक्साइड फ्लॉक तथा वायुवीकरण से बने ऑक्सीकृत लोहा-मैंगनीज कण द्रुत बालू या द्वि-माध्यम फिल्टर पर रोक लिए जाते हैं, जिससे जल की मलिनता (टर्बिडिटी) न्यून हो जाती है।

  4. असंक्रमण / विसंक्रमण (डिसइंफेक्शन) — सबसे अंत में क्लोरीन, क्लोरैमीन, ओज़ोन अथवा पराबैंगनी किरणों से रोगाणु नष्ट किए जाते हैं। निलंबित कण कीटाणुनाशक की माँग बढ़ाते हैं और सूक्ष्मजीवों को ढाल देते हैं, इसलिए रोगाणुनाशन तभी विश्वसनीय और मितव्ययी होता है जब जल पहले से निर्मल हो; क्लोरीन तथा क्लोरैमीन पाइपलाइन में रक्षात्मक अवशिष्ट भी छोड़ते हैं, जबकि ओज़ोन और पराबैंगनी किरणें नहीं छोड़तीं।

तुलनात्मक जाँच। इस क्रम में फेरबदल करने पर निर्भरता की श्रृंखला टूट जाती है:

क्रम में परिवर्तन

क्या गड़बड़ होती है

वायुवीकरण व मृदुकरण से पहले छानना

कठोरता अभी घुली अवस्था में है, अतः फिल्टर उसे पकड़ नहीं सकता; अवक्षेप आगे बनकर पाइपलाइन में जमाव करता है।

निस्पंदन से पहले रोगाणुनाशन

फ्लॉक व निलंबित ठोस कीटाणुनाशक खपा देते हैं और सूक्ष्मजीवों को ढँक लेते हैं, जिससे रोगाणुनाशन अविश्वसनीय हो जाता है और भरोसेमंद अवशिष्ट नहीं बचता।

मृदुकरण के बाद वायुवीकरण

घुली CO2 चूने से क्रिया कर उसे व्यर्थ खर्च कराती है और लोहा-मैंगनीज बिना ऑक्सीकृत हुए आगे निकल जाते हैं।

अतः कठोर भूमिगत जल के लिए सही क्रम है — वायुवीकरण → मुलायम बनाना → निस्पंदन → असंक्रमण, अर्थात् (C), (B), (D), (A)।

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