जब क्षोभमंडल अधिक मेघमय बन जाता है तो सौर अभिवाह (फलक्स) का अधिक परावर्तन करता…

2024

जब क्षोभमंडल अधिक मेघमय बन जाता है तो सौर अभिवाह (फलक्स) का अधिक परावर्तन करता है। वैश्विक तापन के संदर्भ में यह किसका उदाहरण है?

Answer: B. नकारात्मक प्रतिपुष्टिसंकल्पनाप्रतिपुष्टि चक्र तंत्र की उस प्रतिक्रिया को कहते हैं जो लौटकर उसी परिवर्तन पर प्रभाव डालती है जिससे वह उत्पन्न हुई। सकारात्मक प्रतिपुष्टि उस परिवर्तन…

  1. A.

    सकारात्मक प्रतिपुष्टि

  2. B.

    नकारात्मक प्रतिपुष्टि

  3. C.

    न तो सकारात्मक, न ही नकारात्मक प्रतिपुष्टि

  4. D.

    सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों तरह की प्रतिपुष्टि

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Correct answer: B

संकल्पना

प्रतिपुष्टि चक्र तंत्र की उस प्रतिक्रिया को कहते हैं जो लौटकर उसी परिवर्तन पर प्रभाव डालती है जिससे वह उत्पन्न हुई। सकारात्मक प्रतिपुष्टि उस परिवर्तन को प्रबल करके तंत्र को उसी दिशा में और आगे ले जाती है; नकारात्मक प्रतिपुष्टि उसका प्रतिकार करके तंत्र को उसकी पूर्व अवस्था की ओर लौटाती है, इसीलिए नकारात्मक प्रतिपुष्टि स्थायित्व देने वाला स्व-नियामक प्रतिरूप है।

अनुप्रयोग

  1. मूल परिवर्तन को क्षोभमंडल का गर्म होना मानिए।

  2. प्रश्न स्वयं उस परिवर्तन की प्रतिक्रिया दे देता है: क्षोभमंडल अधिक मेघमय हो जाता है। इस बढ़ी हुई मेघमयता को दिया हुआ मानिए, उसे व्युत्पन्न मत कीजिए — वास्तविक मेघ आवरण आपेक्षिक आर्द्रता, वायुसंचरण और मेघ के प्रकार पर निर्भर करता है, अतः वह केवल गर्म वायुमंडल से स्वतः सिद्ध नहीं होता।

  3. मेघों के शीर्ष का एल्बिडो उच्च होता है, अतः आपतित सौर अभिवाह का बड़ा भाग अवशोषित होने के बजाय अंतरिक्ष में परावर्तित हो जाता है।

  4. अवशोषित सौर ऊर्जा घटने से सतह और निचले वायुमंडल में शीतलन की प्रवृत्ति उत्पन्न होती है।

  5. यह प्रतिक्रिया (शीतलन) अपने जनक परिवर्तन (तापन) के विरुद्ध कार्य करती है, अर्थात् चक्र प्रवृत्ति को प्रबल करने के बजाय दुर्बल करता है — यही नकारात्मक प्रतिपुष्टि है।

प्रति-परीक्षण

  • इसकी तुलना हिम–एल्बिडो चक्र से कीजिए, जो सकारात्मक प्रतिपुष्टि का मानक उदाहरण है: तापन से परावर्तक हिम पिघलती है, नीचे की गहरे रंग की सतह अधिक सौर ऊर्जा अवशोषित करती है और तापन और बढ़ जाता है।

  • वास्तविक जलवायु तंत्र में मेघ बहिर्गामी दीर्घ-तरंग विकिरण को भी रोकते हैं, जो तापन प्रभाव है; इसीलिए निवल मेघ प्रतिपुष्टि आज भी शोध का विषय है। परंतु प्रश्न केवल एक ही क्रियाविधि — सौर अभिवाह के अतिरिक्त परावर्तन — को अलग करके पूछता है, और वह क्रियाविधि अकेले तापन का प्रतिकार करती है।

परिणाम: प्रश्न में वर्णित चक्र नकारात्मक प्रतिपुष्टि है — यह प्रवृत्ति को दुर्बल करने वाला और स्व-सुधारक है।

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