निरपेक्ष न्यायवाक्य के नियमों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
2024
निरपेक्ष न्यायवाक्य के नियमों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
Answer: D. न्यायवाक्यात्मक तर्क में ठीक तीन पद होने चाहिए। — अवधारणानिरपेक्ष न्यायवाक्य दो आधार-वाक्यों और एक निष्कर्ष से निर्मित निगमनात्मक तर्क है। इसके तीन पद हैं—वृहत् पद (निष्कर्ष का विधेय), लघु पद (निष्कर्ष का…
- A.
दो निषेधात्मक आधार-वाक्यों से निषेधात्मक निष्कर्ष निकाला जाता है।
- B.
आधार-वाक्यों में व्याप्त कोई भी पद अनिवार्यतः निष्कर्ष में भी व्याप्त होना चाहिए।
- C.
मध्य पद दोनों आधार-वाक्यों में व्याप्त होना चाहिए।
- D.
न्यायवाक्यात्मक तर्क में ठीक तीन पद होने चाहिए।
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Correct answer: D
अवधारणा
निरपेक्ष न्यायवाक्य दो आधार-वाक्यों और एक निष्कर्ष से निर्मित निगमनात्मक तर्क है। इसके तीन पद हैं—वृहत् पद (निष्कर्ष का विधेय), लघु पद (निष्कर्ष का उद्देश्य) और मध्य पद, जो आधार-वाक्यों को जोड़ता है, किंतु निष्कर्ष में उपस्थित नहीं होता।
वैधता के लिए मध्य पद कम-से-कम एक बार व्याप्त होना चाहिए; निष्कर्ष में व्याप्त पद अपने संगत आधार-वाक्य में भी व्याप्त होना चाहिए; और दो निषेधात्मक आधार-वाक्यों से कोई निष्कर्ष नहीं निकलता।
अनुप्रयोग
प्रत्येक कथन की नियामक नियमों से तुलना करें:
दो निषेधात्मक आधार-वाक्य किसी भी निरपेक्ष निष्कर्ष को वैध नहीं बनाते; अतः केवल उनसे निषेधात्मक निष्कर्ष नहीं निकाला जाता।
व्याप्ति का नियम निष्कर्ष से आधार-वाक्यों की ओर लागू होता है: निष्कर्ष में व्याप्त पद संगत आधार-वाक्य में पहले से व्याप्त होना चाहिए।
मध्य पद कम-से-कम एक बार व्याप्त होना चाहिए, दोनों आधार-वाक्यों में व्याप्त होना आवश्यक नहीं है।
निरपेक्ष न्यायवाक्य में ठीक तीन पद—वृहत्, लघु और मध्य पद—होते हैं।
पुनःपरीक्षण
‘सभी M, P हैं; सभी S, M हैं; अतः सभी S, P हैं’ इस रूप में केवल M, S और P पद हैं। मध्य पद M प्रथम आधार-वाक्य में व्याप्त है, किंतु द्वितीय आधार-वाक्य में व्याप्त नहीं है; इससे स्पष्ट होता है कि दोनों आधार-वाक्यों में उसका व्याप्त होना आवश्यक नहीं है।
परिणाम
अतः सही कथन है: ‘न्यायवाक्यात्मक तर्क में ठीक तीन पद होने चाहिए।’