यदि कोई शोधार्थी, प्लेसबो अभिविन्यास में यथार्थ (कंट्रोल) समूह के होने का…
2024
यदि कोई शोधार्थी, प्लेसबो अभिविन्यास में यथार्थ (कंट्रोल) समूह के होने का निर्णय लेता है, तो उसके पास कितने समूह होना चाहिए?
Answer: C. तीन समूह — संकल्पना: प्रायोगिक अनुसंधान में प्रत्येक भिन्न स्थिति (कंडीशन) के लिए एक अलग समूह रखा जाता है, क्योंकि प्रभाव का आकलन समूहों की आपसी तुलना से ही होता है।…
- A.
एक समूह
- B.
दो समूह
- C.
तीन समूह
- D.
चार समूह
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Correct answer: C
संकल्पना: प्रायोगिक अनुसंधान में प्रत्येक भिन्न स्थिति (कंडीशन) के लिए एक अलग समूह रखा जाता है, क्योंकि प्रभाव का आकलन समूहों की आपसी तुलना से ही होता है। प्लेसबो अभिविन्यास का उद्देश्य उपचार के वास्तविक (सक्रिय) प्रभाव को उस अपेक्षा-जनित प्रभाव से अलग करना है जो केवल इस विश्वास से उत्पन्न होता है कि कुछ दिया गया है। इसलिए समूहों की संख्या = अलग-अलग रखी जाने वाली स्थितियों की संख्या।
अनुप्रयोग: यहाँ शोधार्थी प्लेसबो अभिविन्यास में यथार्थ (कंट्रोल) समूह भी रखना चाहता है, अतः तीन भिन्न स्थितियाँ आवश्यक हैं —
प्रायोगिक (उपचार) समूह — इसे वास्तविक, सक्रिय उपचार दिया जाता है।
प्लेसबो समूह — इसे रूप और प्रक्रिया में समान, परंतु निष्क्रिय (बिना सक्रिय तत्व वाला) पदार्थ दिया जाता है।
यथार्थ (कंट्रोल) समूह — इसे न उपचार दिया जाता है और न प्लेसबो; यह प्राकृतिक आधार-रेखा (बेसलाइन) प्रदान करता है।
प्रति-जाँच: यादृच्छिक आवंटन, समान संपर्क-प्रक्रिया और ब्लाइंडिंग की सामान्य शर्तों के अंतर्गत प्रत्येक तुलना किस प्रभाव को दर्शाती है —
उपचार समूह बनाम प्लेसबो समूह: यह अंतर उपचार के सक्रिय तत्व के प्रभाव को दर्शाता है, क्योंकि दोनों समूहों को कुछ न कुछ दिया गया है।
प्लेसबो समूह बनाम यथार्थ कंट्रोल समूह: यह अंतर अपेक्षा (प्लेसबो) प्रभाव को दर्शाता है, क्योंकि दोनों में सक्रिय तत्व अनुपस्थित है।
यदि यथार्थ कंट्रोल समूह हटा दिया जाए तो दो ही स्थितियाँ बचती हैं और अपेक्षा-जनित प्रभाव को अलग से नहीं आँका जा सकता; और चौथा समूह तभी आवश्यक होता है जब कोई चौथी भिन्न स्थिति (जैसे दूसरी मात्रा) भी परिभाषित की जाए, जो इस प्रश्न में नहीं है।
निष्कर्ष: शोधार्थी के पास तीन समूह होने चाहिए — उपचार समूह, प्लेसबो समूह और यथार्थ (कंट्रोल) समूह।