1834 के कुख्यात कार्यवृत्त (मिनट्स) को किससे संबद्ध किया जा सकता है
2024
1834 के कुख्यात कार्यवृत्त (मिनट्स) को किससे संबद्ध किया जा सकता है
Answer: C. थॉमस बैबिंगटन मैकॉले — अवधारणा: ब्रिटिश भारत की सरकार में “मिनट” एक औपचारिक टिप्पणी होती थी, जिसे गवर्नर-जनरल की परिषद का कोई सदस्य अपनी राय आधिकारिक अभिलेख में दर्ज कराने के लिए…
- A.
चार्ल्स वुड
- B.
विलियम बैंटिक
- C.
थॉमस बैबिंगटन मैकॉले
- D.
चार्ल्स ग्रांट
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Correct answer: C
अवधारणा: ब्रिटिश भारत की सरकार में “मिनट” एक औपचारिक टिप्पणी होती थी, जिसे गवर्नर-जनरल की परिषद का कोई सदस्य अपनी राय आधिकारिक अभिलेख में दर्ज कराने के लिए लिखता था। यहाँ उल्लिखित मिनट वह टिप्पणी है जिसने 1830 के दशक के आंग्लवादी–प्राच्यवादी विवाद का निर्णय किया: इसमें तर्क दिया गया कि ईस्ट इंडिया कंपनी के शिक्षा-अनुदान को शास्त्रीय संस्कृत और अरबी विद्वत्ता के बजाय अंग्रेज़ी-माध्यम से पश्चिमी ज्ञान प्रदान करने पर व्यय किया जाना चाहिए; इस दावे के साथ भारतीय और अरबी लेखन को तुच्छ ठहराया गया कि “किसी अच्छे यूरोपीय पुस्तकालय की एक अकेली अलमारी भारत और अरब के समूचे देशज साहित्य से अधिक मूल्यवान थी”; और “ऐसे व्यक्तियों का एक वर्ग तैयार करने” का लक्ष्य रखा गया, “जो रक्त और वर्ण से भारतीय हों, किंतु रुचि, विचारों, नैतिकता और बुद्धि से अंग्रेज़ हों”। देशज ज्ञान के प्रति इसी तिरस्कार के कारण यह टिप्पणी कुख्यात मानी जाती है।
अनुप्रयोग: उस टिप्पणी को दर्ज करने वाले परिषद-सदस्य थॉमस बैबिंगटन मैकॉले थे। वे 1834 में गवर्नर-जनरल की परिषद के प्रथम विधि सदस्य के रूप में भारत आए और जनरल कमेटी ऑफ पब्लिक इंस्ट्रक्शन के अध्यक्ष नियुक्त हुए; इसी पद पर रहते हुए उन्होंने इसे लिखा। इसकी स्वीकृत तिथि 2 फ़रवरी 1835 है; भारतीय परीक्षा-स्रोत कभी-कभी इसे 1834 से संबद्ध करते हैं—वह वर्ष जब मैकॉले ने यह पद संभाला और शिक्षा-विवाद उनके विचारार्थ भेजा गया।
प्रति-परीक्षण — सूची में दिए गए अन्य नाम वस्तुतः कहाँ आते हैं:
चार्ल्स वुड — उनके नाम से संबद्ध शिक्षा-दस्तावेज़ 1854 का वुड्स डिस्पैच है, जिसने प्रत्येक प्रेसीडेंसी में लोक शिक्षा विभाग स्थापित करने का प्रावधान किया और कलकत्ता, बॉम्बे तथा मद्रास में विश्वविद्यालयों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। यह लंदन से भेजा गया एक डिस्पैच था और दो दशक बाद आया था।
विलियम बैंटिक — गवर्नर-जनरल के रूप में उन्होंने 7 मार्च 1835 के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए, जिसने इस नीति को विधिक रूप दिया। सरकार के प्रमुख के रूप में उन्होंने उस टिप्पणी के आधार पर कार्रवाई की; स्वयं टिप्पणी एक परिषद-सदस्य ने दर्ज की थी।
चार्ल्स ग्रांट — पश्चिमी शिक्षा के पक्ष में उनका तर्क 1792 में लिखी पुस्तिका ‘ग्रेट ब्रिटेन की एशियाई प्रजा में समाज की स्थिति पर टिप्पणियाँ’ में प्रस्तुत किया गया था। यह चार दशक पहले लंदन में लिखी गई थी और परिषद के मिनट के बजाय एक पुस्तिका थी।
उत्तर: थॉमस बैबिंगटन मैकॉले।