पहचान की वह अवस्था/स्थिति जिसमें व्यक्ति न तो सार्थक विकल्पों का अन्वेषण करता…
2024
पहचान की वह अवस्था/स्थिति जिसमें व्यक्ति न तो सार्थक विकल्पों का अन्वेषण करता है और न ही कोई वचनबद्धता अपनाता है, कहलाती है:
Answer: B. पहचान विसरण — संकल्पनाजेम्स मार्सिया की पहचान-स्थिति रूपरेखा पहचान-निर्माण का वर्णन दो स्वतंत्र आयामों के आधार पर करती है। अन्वेषण (जिसे संकट भी कहा जाता है) व्यवसाय,…
- A.
पहचान विलंबन
- B.
पहचान विसरण
- C.
पहचान उपलब्धि
- D.
पहचान मोचन
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Correct answer: B
संकल्पना
जेम्स मार्सिया की पहचान-स्थिति रूपरेखा पहचान-निर्माण का वर्णन दो स्वतंत्र आयामों के आधार पर करती है। अन्वेषण (जिसे संकट भी कहा जाता है) व्यवसाय, विचारधारा और मूल्यों जैसे क्षेत्रों में सार्थक विकल्पों की सक्रिय जाँच है। वचनबद्धता किसी चुने हुए विकल्प में व्यक्ति द्वारा किया गया दृढ़ व्यक्तिगत निवेश है। चूँकि प्रत्येक आयाम विद्यमान या अनुपस्थित हो सकता है, इसलिए दोनों आयामों के संयोजन से ठीक चार पहचान-स्थितियाँ बनती हैं; अतः किसी स्थिति की पहचान व्यक्ति की आयु या चयन की विषयवस्तु से नहीं, बल्कि प्रत्येक आयाम की विद्यमानता या अनुपस्थिति को देखकर की जाती है। इस प्रश्न-पत्र में प्रयुक्त पद "पहचान मोचन" का आशय "पहचान पूर्वनिर्धारण" से है, अर्थात वह स्थिति जिसमें व्यक्ति स्वयं अन्वेषण किए बिना दूसरों से प्राप्त वचनबद्धता को अपना लेता है; इसे ऋण-मोचन जैसे अर्थ में न लें।
अनुप्रयोग
प्रश्न-कथन पहले आयाम को निर्धारित करता है: व्यक्ति सार्थक विकल्पों की खोज नहीं करता, इसलिए अन्वेषण अनुपस्थित है।
प्रश्न-कथन दूसरे आयाम को निर्धारित करता है: व्यक्ति कोई वचनबद्धता ग्रहण नहीं करता, इसलिए वचनबद्धता अनुपस्थित है।
मार्सिया की दो-गुणा-दो योजना में युग्म (अन्वेषण अनुपस्थित, वचनबद्धता अनुपस्थित) को देखें। जिस कोष्ठक में दोनों आयाम अनुपस्थित होते हैं, वह पहचान विसरण है।
पुनःपुष्टि
चारों पहचान-स्थितियों को इन्हीं दो आयामों पर रखने से पुष्टि होती है कि केवल एक कोष्ठक में दोनों आयाम अनुपस्थित होते हैं:
स्थिति | अन्वेषण | वचनबद्धता |
|---|---|---|
पहचान विसरण | अनुपस्थित | अनुपस्थित |
पहचान मोचन (पूर्वनिर्धारण) | अनुपस्थित | विद्यमान |
पहचान विलंबन | विद्यमान (जारी) | अनुपस्थित |
पहचान उपलब्धि | विद्यमान (पूर्ण) | विद्यमान |
पहचान विलंबन में व्यक्ति सक्रिय खोज की प्रक्रिया में होता है; अतः इसमें अन्वेषण विद्यमान होता है, जिसका प्रश्न-कथन में निषेध है।
पहचान मोचन (पूर्वनिर्धारण) में व्यक्ति माता-पिता या प्राधिकारी व्यक्तियों से प्राप्त वचनबद्धता को पहले ही अपना चुका होता है; अतः इसमें वचनबद्धता विद्यमान होती है, जिसका प्रश्न-कथन में निषेध है।
पहचान उपलब्धि में पूर्ण अन्वेषण और स्व-चयनित वचनबद्धता दोनों विद्यमान होते हैं, जबकि प्रश्न-कथन दोनों का निषेध करता है।
इस प्रकार, सार्थक विकल्पों का अन्वेषण न होने और वचनबद्धता न होने की वर्णित अवस्था कहलाती है पहचान विसरण।