उस समुच्चय का चयन करें जिसकी संख्याएँ उसी प्रकार संबंधित हैं जिस प्रकार…

2025

उस समुच्चय का चयन करें जिसकी संख्याएँ उसी प्रकार संबंधित हैं जिस प्रकार निम्नलिखित समुच्चय की संख्याएँ संबंधित हैं।

(नोट: संख्याओं को उनके घटक अंकों में तोड़े बिना संक्रियाएँ पूर्ण संख्याओं पर की जानी चाहिए। उदाहरण के लिए, 13 लीजिए - 13 में जोड़ना/घटाना/गुणा करना आदि संक्रियाएँ केवल 13 पर की जा सकती हैं। 13 को 1 और 3 में तोड़ना तथा 1 और 3 पर गणितीय संक्रियाएँ करने की अनुमति नहीं है।)

(46, 78, 62)

(21, 175, 98)

Answer: A. (43, 213, 128)अवधारणा: संख्या-समुच्चय सादृश्य (नंबर सेट एनालॉजी) प्रश्नों में, दिए गए मूल समुच्चयों की संख्याओं के बीच एक निश्चित अंकगणितीय संबंध (जैसे योग, अंतर, गुणा या…

  1. A.

    (43, 213, 128)

  2. B.

    (50, 208, 119)

  3. C.

    (40, 126, 63)

  4. D.

    (49, 61, 21)

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Correct answer: A

अवधारणा: संख्या-समुच्चय सादृश्य (नंबर सेट एनालॉजी) प्रश्नों में, दिए गए मूल समुच्चयों की संख्याओं के बीच एक निश्चित अंकगणितीय संबंध (जैसे योग, अंतर, गुणा या भाग) खोजा जाता है। यह संबंध दोनों दिए गए समुच्चयों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। संबंध की पुष्टि होने के बाद, उसी संबंध को प्रत्येक विकल्प की संख्याओं पर लागू करके जाँचा जाता है कि कौन-सा समुच्चय उसी नियम का पालन करता है।

अनुप्रयोग:

  1. पहले समुच्चय (46, 78, 62) में पहली दो संख्याओं का योग ज्ञात करें: 46 + 78 = 124।

  2. इस योग को 2 से भाग दें: 124 ÷ 2 = 62, जो समुच्चय की तीसरी संख्या के बराबर है। अतः तीसरी संख्या पहली दो संख्याओं के औसत (माध्य) के बराबर है।

  3. इसी संबंध की दूसरे समुच्चय (21, 175, 98) पर पुष्टि करें: 21 + 175 = 196, और 196 ÷ 2 = 98, जो पुनः तीसरी संख्या के बराबर है।

  4. अतः नियम निश्चित होता है: पहली संख्या + दूसरी संख्या = 2 × तीसरी संख्या (अर्थात तीसरी संख्या सदैव पहली दो संख्याओं का औसत होती है)।

जाँच: अब यही नियम प्रत्येक विकल्प की संख्याओं पर लागू करें:

समुच्चय

पहली + दूसरी संख्या

तीसरी संख्या × 2

(43, 213, 128)

43 + 213 = 256

128 × 2 = 256

(50, 208, 119)

50 + 208 = 258

119 × 2 = 238

(40, 126, 63)

40 + 126 = 166

63 × 2 = 126

(49, 61, 21)

49 + 61 = 110

21 × 2 = 42

परिणाम: केवल समुच्चय (43, 213, 128) में यह संबंध पूर्ण रूप से संतुष्ट होता है, क्योंकि इसमें पहली दो संख्याओं का योग (256) तीसरी संख्या के दोगुने (256) के ठीक बराबर है। शेष तीनों समुच्चयों में यह दोनों मान परस्पर बराबर नहीं होते। अतः समुच्चय (43, 213, 128) दिए गए मूल समुच्चयों के समान प्रकार से संबंधित है।

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