मूलतः भारतीय संविधान द्वारा कितने मौलिक अधिकारों को मान्यता दी गई थी?
2025
मूलतः भारतीय संविधान द्वारा कितने मौलिक अधिकारों को मान्यता दी गई थी?
Answer: A. 7 — मौलिक अधिकार भारत के संविधान के भाग III (अनुच्छेद 12-35) में प्रदत्त न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय प्रत्याभूतियाँ हैं। इनकी गणना प्रत्येक अनुच्छेद के आधार पर…
- A.
7
- B.
8
- C.
6
- D.
5
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Correct answer: A
मौलिक अधिकार भारत के संविधान के भाग III (अनुच्छेद 12-35) में प्रदत्त न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय प्रत्याभूतियाँ हैं। इनकी गणना प्रत्येक अनुच्छेद के आधार पर नहीं, बल्कि अधिकारों की व्यापक श्रेणियों के रूप में की जाती है; प्रत्येक श्रेणी में अनुच्छेदों का एक समूह सम्मिलित होता है। चूँकि भाग III में भी संशोधन किए गए हैं, इसलिए किसी प्रश्न में अपेक्षित संख्या उसके संदर्भित समय पर निर्भर करती है—मूल रूप से अधिनियमित सूची अथवा वर्तमान सूची।
“मूलतः” शब्द उस समय को 26 जनवरी 1950 के रूप में निर्धारित करता है, जब संविधान लागू हुआ था। अधिनियमित भाग III में प्रत्याभूतियों को निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया था:
समता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18)
स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22)
शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23-24)
धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25-28)
सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार (अनुच्छेद 29-30)
संपत्ति का अधिकार (अनुच्छेद 31)
संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32)
उस मूल सूची की श्रेणियों की गणना करने पर मौलिक अधिकारों की संख्या सात होती है।
वर्तमान सूची से इसकी पुनः जाँच करें: संविधान (चवालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1978 ने संपत्ति के अधिकार को भाग III से हटा दिया और उसे अनुच्छेद 300क के अंतर्गत एक संवैधानिक अधिकार (अब मौलिक अधिकार नहीं) के रूप में पुनः स्थापित किया। इसी एक अधिकार को हटाए जाने से सूची में मौलिक अधिकारों की संख्या सात से घटकर वर्तमान में मान्य छह हो गई। इससे पुष्टि होती है कि वर्तमान संख्या छह है, जबकि मूल संख्या सात थी।
दिए गए प्रत्येक मान का तुलनात्मक विवेचन:
मान | यह संख्या क्या दर्शाती है |
|---|---|
7 | 1950 की सूची में संपत्ति के अधिकार सहित अधिकारों की श्रेणियों की संख्या — “मूलतः” शब्द के अनुसार यही अपेक्षित संख्या है। |
8 | मूल रूप से अंगीकृत संविधान में अनुसूचियों की संख्या; यह अनुसूचियों की गणना है, भाग III की अधिकार-श्रेणियों की नहीं। |
6 | चवालीसवें संशोधन द्वारा संपत्ति के अधिकार को भाग III से हटाए जाने के बाद वर्तमान में मान्य मौलिक अधिकारों की संख्या। |
5 | अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उपलब्ध रिटों की संख्या — बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण, अधिकार-पृच्छा; यह रिटों की गणना है, भाग III की अधिकार-श्रेणियों की नहीं। |