पाश्चात्य काव्यालोचना में किन तत्त्वों पर सर्वाधिक ध्यान दिया गया है?

2025

पाश्चात्य काव्यालोचना में किन तत्त्वों पर सर्वाधिक ध्यान दिया गया है?

Answer: D. कल्पना और व्यक्तित्वअवधारणागद्यांश-आधारित प्रश्नों में उत्तर सामान्य साहित्यिक ज्ञान से नहीं, बल्कि लेखक द्वारा स्पष्ट रूप से दिए गए बल से निर्धारित किया जाता है। प्रश्न के मुख्य…

  1. A.

    रस-सिद्धांत की प्रतिष्ठा

  2. B.

    काव्य की गंभीर रमणीयता

  3. C.

    शृंगार भाव

  4. D.

    कल्पना और व्यक्तित्व

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Correct answer: D

अवधारणा

गद्यांश-आधारित प्रश्नों में उत्तर सामान्य साहित्यिक ज्ञान से नहीं, बल्कि लेखक द्वारा स्पष्ट रूप से दिए गए बल से निर्धारित किया जाता है।

प्रश्न के मुख्य संकेत-शब्दों को पहचानकर उनका मिलान गद्यांश के प्रत्यक्ष कथन से करना चाहिए।

अनुप्रयोग

  1. प्रश्न में पूछा गया है कि पाश्चात्य समीक्षा-क्षेत्र में किस विषय की सर्वाधिक चर्चा हुई।

  2. आरंभिक वाक्य में कहा गया है कि “कल्पना” और “व्यक्तित्व” का इतना अधिक प्रतिपादन हुआ कि आलोचकों का ध्यान इन्हीं दोनों पर केंद्रित हो गया।

  3. आगे का वर्णन भी इसी अंतर की पुष्टि करता है: भारतीय दृष्टि भाव और रस पर बल देती है, जबकि पाश्चात्य समीक्षा कल्पना के माध्यम से बोध-पक्ष पर केंद्रित होती गई।

अंतर-परीक्षण

  • रस-सिद्धांत की प्रतिष्ठा को गद्यांश भारतीय भाव-दृष्टि से जोड़ता है।

  • गंभीर रमणीयता के स्थान पर गद्यांश हल्के आनंद तक सीमित दृष्टि की आलोचना करता है।

  • शृंगार प्रेम-संबंधी काव्यभाव है; गद्यांश भावों की सूची में रति आदि का उल्लेख करता है, पर सर्वाधिक चर्चा के उत्तर के रूप में किसी एक भाव को नहीं रखता।

  • कल्पना और व्यक्तित्व को पाश्चात्य समीक्षा में अत्यधिक प्रतिपादित दो तत्त्वों के रूप में सीधे बताया गया है।

परिणाम

अतः उत्तर कल्पना और व्यक्तित्व है।

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